कैग के बहाने कांग्रेस ने खोला मोर्चा

रायपुर | समाचार डेस्क: कैग की रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ सरकार के खिलाफ आई टिप्पणियों ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है. कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री रमन सिंह और उनकी सरकार पर कैग के हवाले से कई गंभीर आरोप लगाये हैं.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और कांग्रेस विधायक दल के नेता टी.एस. सिंहदेव ने कहा है कि मुख्यमंत्री रमन सिंह बाते तो भ्रष्टाचार के जीरो टालरेंस की करते है हकीकत में उनकी सरकार के सभी विभागों में सीएजी ने करोड़ों के भ्रष्टाचार के मामलो को पकड़ा है. नियंत्रण और महालेखाकार की ताजा रिपोर्ट से एक बार फिर भाजपा का भ्रष्टाचारी चेहरा खुलकर सामने आया है.


इन नेताओं ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार की गड़बड़ियां, अनियमिततायें, घपले, घोटाले मार्च 2013 में समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में सीएजी की रिपोर्ट में बेनकाब हो गये है. मुख्यमंत्री के प्रभार के ऊर्जा विभाग में खराब वित्तीय प्रबंधन और परियोजना के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार, लापरवाही और निगरानी में कमी के कारण राज्य विद्युत वितरण कंपनी को 2012.27 करोड़ का नुकसान हुआ है. नागरिक आपूर्ति निगम को 78.88 करोड़ की गड़बडि़यों को सीएजी ने पकड़ा है. छात्रों को छात्रवृत्ति भुगतान की राशि 121.14 करोड़ की सत्यता ही सुनिश्चित नहीं है.

बघेल और सिंहदेव ने कहा है कि भाजपा सरकार 6848.30 करोड़ के सरकारी कार्यों की उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दे सकी. वर्ष 2012-13 के दौरान वाणिज्यिक कर की प्राप्ति में 5.22 प्रतिशत की कमी हुई है. आबकारी विभाग में सरकार द्वारा 20.02 करोड़ की वसूली नहीं कर पायी. कैम्पा फंड में 219.92 करोड़ का व्यय में गडबड़ी. जिला पंचायतों एवं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, कल्याण विभाग में 2260.09 करोड़ का अनियमित आहरण को सीएजी ने उजागर किया. केन्द्र की खाद्य सुरक्षा योजना का नाम बदल कर छत्तीसगढ़ में लागू किया. 899 करोड़ का गलत दावा केन्द्र से रमन सरकार ने प्रस्तुत किया.

अपने बयान में कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में 899 करोड़ का घोटाला भी सीएजी ने रेखांकित किया है. मिड डे मील योजना में 35.78 करोड़ का घोटाला किया गया. केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं का 7.43 लाख टन चांवल और 1.91 लाख टन गेहूं मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना में गलत तरीके से 1975.43 करोड़ का डायवर्सन कर 899.12 करोड़ का गलत दावा किया गया. 760.93 करोड़ का अनुदान दावा नहीं किया जा सका और 186.81 करोड़ की ब्याज हानि हुये. सीएजी के रिपोर्ट में स्वायत्त निकायों में भी बड़े पैमाने पर गड़बडि़यां और अनिमियताएं पकड़ायी है. किसी भी स्वायत्त निकाय जैसे छत्तीसगढ़ गृहमंडल द्वारा 31 मार्च 2013 तक कोई भी लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया.

रमन सिंह की सरकार पर निशाना साधते हुये इन नेताओं ने कहा है कि बेहद गंभीर त्रुटि सीएजी ने अपने परीक्षण में यह भी पकड़ी है कि वर्ष 2009 से 2013 में कुल 16664 करोड़ रू. के आहरण मे से 2260.09 करोड़ रू. की राशि आठ चयनित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (डी.डी.ओ) के एस.आर. देयकों से अनियमित आहरण हुआ. चयनित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (डी.डी.ओ) के एस.आर देयको से संबंधित अभिलेखों की जांच में निधियों का अनियमित आहरण, अव्ययित राशि 185.67 करोड़ रू. वापस नहीं किया गया और 504.05 करोड़ रू. का प्रमाणक/पूर्णता प्रमाण-पत्र और छात्रवृत्ति मद में 121.14 करोड़ रू. के भुगतान प्रमाणक लेखा परीक्षा को प्रस्तुत नहीं किया गया.

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि विभिन्न अनुदानग्रही संस्थाओं द्वारा प्राप्त अनुदानों के खिलाफ उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रदान करने में विलंब किया जा रहा है. वित्तीय वर्ष 2012-13 के अंत तक विभिन्न विभागों से संबंधित एक से 25 वर्ष के मध्य के 15.81 करोड़ रू. हानि एवं गबन के 1586 प्रकरण अपलेखन/नियमितिकरण हेतु लंबित थे. विविध लोक निर्माण अग्रिम के अंतर्गत कुल राशि 133.01 करोड़ तीन निर्माण विभाग यथा लोक निर्माण विभाग, जल संसाधन विभाग एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में 31 मार्च 2013 तक समयोजन हेतु लंबित था. छः संभागों के लेखा परीक्षा जांच में अग्रिम राशि 24.02 करोड़ रू. 275 प्रकरण में असमायोजित पाया गया. आगे इन विभागों के लेखा परीक्षा जांच में पाया गया कि दो विभागों द्वारा 2.17 करोड़ अनियमित रूप से व्यय किया गया, 10.37 करोड़ रू. अग्रिम राशि का वसूली/समायोजन नहीं हुआ 4.55 करोड़ रू. विभागीय अधिकारियों से एवं 6.95 करोड़ अन्य संभागों एवं विभागों से समायोजन लंबित था. इन गड़बडि़यों का ही योग 14000 करोड़ हो जाता है.

बघेल और सिंहदेव ने कहा है कि ज्यादा दुर्भाग्यजनक बात यह है कि दिसंबर 2012 तक जारी 2549 निरीक्षण प्रतिवेदनों की 9943 लेखा परीक्षा आपत्तियां 5930.53 करोड़ जून 2013 तक लंबित है. पूरी सीएजी रिपोर्ट में राज्य को 5000 करोड़ के बजट की 50 प्रतिषत से अधिक की गड़बडि़यां सामने आयी है. मात्र यही एक तथ्य भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार को उजागर कर देता है जो बेहद गंभीर आपत्तिजनक है.

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