डॉक्टरेट के फर्जीवाड़े में फंसे चंपू

रायपुर | विशेष संवाददाता: डॉक्टरेट की मानद उपाधि देने के खेल में इस बार छत्तीसगढ़ के कृषि एवं श्रम मंत्री चंद्रशेखर साहु फंस गये हैं. चंद्रशेखर साहु को बेंगालुरु की जिस न्यू इंटरनेशनल क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी द्वारा डॉक्टरेट ऑफ सोशल वर्क्स की मानद उपाधि दिया जाने वाला है, वह असल में एक एनजीओ है. हालांकि ‘छत्तीसगढ़ खबर’ से बातचीत में इस एनजीओ ने भी इस बात से पल्ला झाड़ लिया है कि वह चंद्रशेखर साहु को कोई डॉक्टरेट की मानध उपाधि दे रहा है.

गौरतलब है कि सरकारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई थी कि कृषि एवं श्रम मंत्री चंद्रशेखर साहू बेंगलुरू की न्यू इंटरनेशनल क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी द्वारा प्रदान की जा रही डॉक्टर ऑफ सोशियल वर्क्स की मानद उपाधि ग्रहण करने 8 अप्रेल को बेंगलुरू जाएंगे. वे इस दिन सवेरे 09.25 बजे की नियमित विमान से बेंगलुरू के लिए रवाना होंगे. श्री साहू वहां न्यू इंटरनेशनल क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित समारोह में भाग लेकर डॉक्टर ऑफ सोशियल वर्क्स की मानद उपाधि ग्रहण करेंगे. विज्ञप्ति के अनुसार किसानों की उन्नति और समृद्धि के लिए कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू द्वारा किए गए गंभीर एवं बहुआयामी कार्यों, दूरदृष्टिपूर्ण नेतृत्व क्षमता और सामाजिक-सार्वजनिक क्षेत्र में दीर्घकालीन सेवा के लिए बेंगलुरू की न्यू इंटरनेशनल क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी उन्हें डॉक्टर ऑफ सोशियल वर्क्स की मानद उपाधि प्रदान कर रही है.

इधर न्यू इंटरनेशनल क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी के निदेशक आर के सैमुअल ने ‘छत्तीसगढ़ खबर’ से बातचीत में स्वीकार किया है कि चंद्रशेखर साहु को उनकी संस्था नहीं, एकेडमी ऑफ युनिवर्सल ग्लोबल पीस मानद उपाधि देगी और एकेडमी ऑफ युनिवर्सल ग्लोबल पीस नामक संस्था की हकीकत ये है कि यह संस्था भारत के किसी भी अकादमिक संस्था या यूजीसी से मान्यता प्राप्त नहीं है. मूलतः इसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करने वाली यह संस्था ऑनलाइन ही डॉक्टरेड की मानद उपाधि बांटती है.

हमने जब एकेडमी ऑफ युनिवर्सल ग्लोबल पीस के बारे में पता किया तो पता चला कि यह संस्था मूलतः 1986 में चेन्नई में रजिस्टर्ड स्नेहालय आश्रम के धार्मिक प्रचार की संस्था है. इस संस्थान की हकीकत को लेकर हमने संस्था के सर्वेसर्वा मधु कृष्णन से जानकारी लेने के लिये संपर्क साधने की कोशिश की लेकिन हम इसमें सफल नहीं हो सके.

मधु कृष्णन और उनकी संस्था को लेकर उनके पूर्व सीईओ बैरिंगटन राय स्चिलर का एक संदेश फेसबुक पर चस्पा है. इस संदेश में कहा गया है कि “डॉ. मधु कृष्णन और स्नेहालय आश्रम: चूंकि अब मैं इस बात का बिल्कुल भी आश्वस्त नहीं रह सकता हूं कि डॉ. मधु कृष्णन का व्यवहार माननीय और वास्तव में लाभ-निरपेक्ष है, मैंने उनके स्नेहालय आश्रम से सीईओ के पद से इस्तीफा दे दिया है और अब एक नए आश्रम की स्थापना करूंगा. मैं उनके डॉक्टर की पदवी बेचने की गतिविधियों या धर्माध्यक्षों (बिशपों) या किसी अन्य पादरी के तथाकथित `अभिषेक करने` की गतिविधियों से कभी भी जुड़ा नहीं रहा हूं.”

जाहिर है, इस संदेश के बाद एकेडमी ऑफ युनिवर्सल ग्लोबल पीस की गतिविधियों की जांच किया जाना जरुरी है.

3 thoughts on “डॉक्टरेट के फर्जीवाड़े में फंसे चंपू

  • April 8, 2013 at 09:23
    Permalink

    ऐसी मानद उपाधि ले कर सिवाय बदनामी के क्या हासिल होगा चंद्रशेखर साहु जी ?? छत्तीसगढ़ खबर ने ऐसे राज उजागर कर दिया है, जिसमें बहुत मवाद भरा है.

    Reply
  • April 8, 2013 at 14:13
    Permalink

    पूरे देश भर में एक बड़ा रैकेट है, जो पैसे ले कर अवार्ड देता है, डाक्टरेट की उपाधि बांटता है. ऐसे लोगों के खिलाफ चंद्रशेखर साहु को खुद आवाज उठा कर जांच करवानी चाहिये थी. लेकिन वो डाक्टरेट लेने के लिये जा रहे हैं. यह शर्मनाक है.

    Reply
  • Pingback: फर्जी डाक्टरेट नहीं लेंगे चंपू

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *