शिशु मृत्यु दर रोकने में छत्तीसगढ़ पिछड़ा

रायपुर | संवाददाता: शिशु मृत्यु दर को रोकने के मामले में छत्तीसगढ़ और पीछे चला गया है. आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ देश में छठवें नंबर पर है. शुक्रवार को संसद में एक सवाल के जवाब में यह तथ्य सामने आया है.

आंकड़ों के अनुसार 2013 के मुकाबले छत्तीसगढ़ में शिशु मृत्यु दर में कमी तो आई है लेकिन 2013 में राज्य सातवें नंबर पर था. यानी देश के आंकड़ों के मुकाबले आज की तारीख में यह स्थिति सुधरने के बजाये एक पायदान और नीचे खिसक गई है.


2013 में जहां राज्य में शिशु मृत्युदर 46 थी, वह 2014 में 43 हुई और 2015 में यह आंकड़ा 41 पर जा पहुंचा. 2016 में राज्य में शिशु मृत्यु दर 39 दर्ज की गई है. यह दर, देश के औसत शिशु मृत्यु दर 34 के मुकाबले कहीं अधिक है.

हालत ये है कि पड़ोसी राज्य झारखंड में भी शिशु मृत्युदर महज 29 तक पहुंच गई है. छत्तीसगढ़ और झारखंड के साथ बने उत्तराखंड में भी यह आंकड़ा 38 है.

पूरे देश में सबसे कम मृत्यु दर गोवा में है, जहां केवल शिशु मृत्यु दर 8 है. इसी तरह पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भी हालात बेहतर हैं. पुड्डुचेरी और केरल में यह आंकड़ा 10 पर है, वहीं मणिपुर में 11. नागालैंड में 12 है तो चंडीगढ़ में 16. तमिलनाडु में शिशु मृत्युदर 17 है.

छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार ने पिछले कुछ सालों में शिशु मृत्युदर को कम करने की कोशिश के तहत कई योजनायें शुरु की हैं. सरकार का दावा है कि कबीरधाम के आदिवासी बहुल इलाकों में भी शिशु मृत्युदर में कमी आई है. लेकिन केंद्र सरकार के आंकड़े बताते हैं कि इस दिशा में राज्य की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है.

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