मानव तस्करी के शिकार छत्तीसगढ़ के लाल

रायपुर | अन्वेषा गुप्ता: छत्तीसगढ़ के 11 लाल मुंबई में मानव तस्करों हाथों से रिहा कराये गये हैं. इनमें से ज्यादातर कांकेर जिले से हैं. फिलहाल मुंबई पुलिस ने इन बच्चों को मुंबई के ही समता नगर बाल सुधारगृह में रखा है. सभी बच्चों की उम्र 13 से 15 साल के बीच की है. मिली जानकारी के अनुसार 28 जून तक सभी कानूनी प्रक्रिया पूरी करके इन बच्चों को उनके परिजनों के हवाले किया जायेगा.

इनमें से ज्यादातर बच्चे राजिम के महर्षि वेद विज्ञान संस्थान पांडुका में पढ़ाई कर रहे थे. संस्थान द्वारा ही उन्हें मध्यप्रदेश के कटनी जिले के मनहेर स्थित महर्षि वेद विज्ञान संस्थान करौंदी भेज दिया गया था. हैरत की बात है कि वहां से यह बच्चे मुंबई पहुंच गये. छत्तीसगढ़ के बच्चों को मुंबई पुलिस द्वारा छुड़ाया गया है. मुंबई पुलिस द्वारा कुल 28 बच्चों को छुड़ाया गया है जिनमें से 11 छत्तीसगढ़ के हैं.


पुलिस ने मानव तस्करी के आरोप में 2 लोगों को गिरफ्तार किया है. उसी के बाद मुंबई पुलिस ने बच्चों के परिजनों को इसकी सूचना दी है.

मुंबई में बरामद बच्चों के नाम
तस्करी के द्वारा अपने को मुंबई ले जाने के बाद उसे वापस लेने वहां पहुंचे एक बच्चे के पिता संतोष पांडेय ने मीडिया को जो जानकारी दी है उसके अनुसार कुछ बच्चों के नाम इस प्रकार से है- हिमांशु दीक्षित, शशांक शुक्ला पंडरभट्टा मुंगेली से, योगेश पांडेय रामनगर रायपुर से, चंद्रप्रसाद तिवारी कोहका भिलाई से, नागेश्वर दुबे कुरूद से, उत्तम कुमार वैष्णव असरा डोंगरगढ़ से, संतोष पांडेय बिलासपुर से, प्रवीण भारती चकरभाठा बिलासपुर से तथा चंदन शर्मा कोहका भिलाई से शामिल है.

मानव तस्करी का शिकार छत्तीसगढ़
अगस्त 2014 में छत्तीसगढ़ के बस्तर की 19 वर्षीय बाला को दिल्ली में बेचा गया था. इतना ही नहीं उसके साथ दिल्ली में दुष्कर्म किये जाने का आरोप भी उसने लगाया था. बस्तर की बाला को दिल्ली में नौकरी दिलाने के नाम लालच में ले जाया गया था तथा वहां पर उसे 50 हजार रुपयों में बेच दिया गया था.

नवंबर 2014 में छत्तीसगढ़ के 10 बंधवा बच्चों को दिल्ली से मंगलवार को छुड़ाया गया था. छत्तीसगढ़ के बच्चों को बंधवा बनाकर रखने के जुर्म में एक महिला सहित 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. यह कार्यवाही छत्तीसगढ़ पुलिस तथा दिल्ली पुलिस ने संयुक्त रूप से की थी. यह सभी बच्चे छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के पत्थलगांव के थे तथा इनकी उम्र 13 से 15 के बीच की है.

दिसंबर 2014 में जशपुर से लापता 12 बच्चियों में से 5 के साथ रेप किया गया था. इस बात की जानकारी छत्तीसगढ़ पुलिस को उस वक्त मिली जब इन बच्चों को बरामद कराया गया. छत्तीसगढ़ पुलिस ने कुल 21 नाबालिक बच्चों को बरामद कराया था.

फरवरी 2015 में जशपुर की 3 नाबालिक लड़कियों को झारखंड से दिल्ली ले जाते हुए बरामद किया गया था. झारखंड पुलिस ने मिली सूचना के आधार पर जशपुर के दुलदुला ब्लॉक की तीन नाबालिक आदिवासी लड़कियों को सड़क के रास्ते दिल्ली ले जाने के समय रात को उन्हें बरामद किया था. इन लड़कियों को एक सामाजिक संस्था ‘सेवा भारती संस्था’ के बैनर तले अच्छी नौकरी दिलाने का लालच देकर दिल्ली ले जाया जा रहा था.

नवंबर 2015 में छत्तीसगढ़ के भिलाई की ललिता 60 हज़ार रुपये में राजस्थान में बिकी थी.

छत्तीसगढ़ का ‘लापतागंज’, रायपुर!
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से गत पांच वर्षो में सबसे ज्यादा बच्चे, लड़किया तथा महिलायों के लापता होने की खबर है. बकौल सरकारी आकड़े, छत्तीसगढ़ से पिछले पांच सालों में जितने बच्चे, लड़किया तथा महिलायें लापता हुई उनमें से राजधानी रायपुर सबसे टॉप पर है. रायपुर को यह रुतबा इसलिये मन को सालता है क्योंकि यहीं पर पुलिस तथा प्रशासन के मुख्यालय स्थित हैं. जाहिर है कि ऐन पुलिस मुख्यालय वाले शहर से यदि राज्य में सबसे ज्यादा बच्चे, लड़किया तथा महिलायें गुम होती हैं तो मन तो करेगा कि सुरक्षा के लिये राज्य के अन्य शहरों की ओर रुख किया जाये. छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले से साल 2010 से लेकर 6 फरवरी 2015 तक 2358 बच्चे तथा 3329 लड़कियां तथा महिलायें लापता हुई हैं.

छत्तीसगढ़ के दूसरे जिलों का हाल
-राजधानी रायपुर के बाद लापता बच्चे, लड़किया तथा महिलायों की संख्या न्यायधानी बिलासपुर में दूसरे नंबर पर है. बिलासपुर जिले से पिछले पांच सालों में 1446 बच्चे तथा 1498 लड़किया तथा महिलायें गायब हुई हैं. राज्य से कुल जितने बच्चे पिछले पांच सालों में लापता हुयें हैं उनमें बिलासपुर जिले से 10.2 फीसदी तथा लड़कियां तथा महिलायें 7.6 फीसदी लापता हुई हैं.

-सरकारी आकड़ों के अनुसार ही छत्तीसगढ़ के जशपुर से पिछले पांच सालों में 533 बच्चे, जगदलपुर से 365, दंतेवाड़ा से 82, कांकेर से 241, कोण्डागांव से 99, बीजापुर से 59, नारायणपुर से 39 तथा सुकमा से 38 बच्चों के लापता होने की खबर है. जहां तक लड़कियों तथा महिलाओं के लापता होने की संख्या है जशपुर से 318, जगदलपुर से 477, दंतेवाड़ा से 133, कांकेर से 506, कोण्डागांव से 187, बीजापुर से 53, नारायणपुर से 43 तथा सुकमा से 12 लड़किया तथा महिलायें गायब हुई हैं.

सर्वोच्य न्यायालय का हस्तक्षेप
-उल्लेखनीय है कि दो साल पहले सर्वोच्य न्यायालय ने छत्तीसगढ़ से पूछा था कि 2011 से 2014 के दौरान जब राज्य में 9400 बच्चे गायब हुए तो केवल 1977 मामलों में ही क्यों अपहरण की रिपोर्ट लिखी गई? इसी के साथ अदालत ने छत्तीसगढ़ के लापता बच्चों के सही आकड़ें के बारे में पूछा है. अदालत ने इसी के साथ ही सर्वोच्य न्यायलय में तथा संसद में पेश लापता बच्चों की संख्या में फर्क पर सफाई पेश करने को कहा है.

भयावह हैं छत्तीसगढ़ के आंकड़े
-नवंबर 2015 तक के सरकारी आकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ से पिछले पांच सालों में कुल 14,118 बच्चे तथा 19,670 लड़कियां तथा महिलायें लापता हुई हैं. ये वो आंकड़े हैं, जो पुलिस रिपोर्ट में दर्ज हैं. वरना आदिवासी इलाकों में तो अधिकांश मामलों में पुलिस रिपोर्ट ही नहीं दर्ज करती. यही कारण है कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी जिलों में बच्चों तथा लड़कियों के लापता होने की संख्या तथा प्रतिशत रायपुर एवं बिलासपुर की तुलना में काफी कम है.

दरअसल, छत्तीसगढ़ से बच्चों की तस्करी करके उन्हें अन्य राज्यों में ले जाकर बेच दिया जाता है. जहां पर उनसे घरेलू नौकर का काम कराया जाता है. न तो उन्हें पगार दी जाती है और न ही उन्हें भरपेट खाने दिया जाता है. देश की राजधानी दिल्ली में तो कई ऐसी कथित प्लेसमेंट एजेंसियां काम कर रही हैं जो इस तरह से बच्चों की तस्करी करके उन्हें आसपास के बड़े शहरों में बेच दिया जाता है.

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