दूध से मौतें: जांच के आदेश

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के जांजगीर में बच्चों को 12 दिन पुराना देवभोग दूध पिलाया गया था. उल्लेखनीय है कि मंगलवार को बीजापुर में आंगनबाड़ी केन्द्र में 2 बच्चों की दूध पीने से मौत हो गई. वहीं जांजगीर में 5 बच्चों की तबियत बिगड़ गई थी. जब जिला कार्यक्रम अधिकारी ने जांजगीर में बचे हुये दूध के पैकेट जब्त किये तो पाया कि उस पर पैकिंग की तारीख 18 मई 2016 अंकित पाया. दूध 30 मई को पिलाया गया था जाहिर है कि अमृत योजना के तहत जांजगीर के आंगनबाड़ी केन्द्र में बच्चों को 12 दिन पुराना दूध पिलाया गया था.

छत्तीसगढ़ सरकार के विज्ञप्पति के अनुसार दूध “पैकेटों में बैच नम्बर सीडीएफओ – 20 बी, 11602 और पैकिंग की तारीख 18 मई 2016 अंकित है. इन पैकेटों के सैम्पल जांच के लिए नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन रायपुर की प्रयोगशाला को भेजे गए हैं.”

हैरत की बात है कि कुपोषण दूर करने के लिये चलाई जा रही मुख्यमंत्री अमृत योजना के लिये स्थानीय दूध का इस्तेमाल करने के स्थान पर देवभोग के दूध को वरीयता दी गई. जो किसी दूसरे स्थान पर पैक करके लाई जाती है. जबकि यदि स्थानीय दूध को ही गर्म करके तथा चीनी मिलाकर दिया जाता तो शायद बीजापुर में दो बच्चों की मौत न होती. मिड-डे मिल को जब स्थानीय तौर पर ही बनाया जाता है तब पैक्ड दूध देने की कौन सी जरूरत आन पड़ी थी?

गौरतलब है कि देवभोग दूध पैक करने का केन्द्र छत्तीसगढ़ के दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़, कोरिया, अंबिकापुर, जशपुर, कवर्धा तथा जगदलपुर में है.

राज्य सरकार ने बीजापुर जिले में एकीकृत बाल विकास परियोजना कुटरू के ग्राम केतुलनार में दो बच्चों की आकस्मिक मृत्यु की घटना की जांच के निर्देश दिये हैं और जिला कलेक्टर से सात दिन के भीतर तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट मांगी है.

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य के बीजापुर जिले के ग्राम केतुलनार विकासखण्ड -भैरमगढ़ के आंगनबाड़ी केन्द्र के दो बच्चों की आकस्मिक मृत्यु पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए दोनों बच्चों के परिवारों को एक-एक लाख रूपए की सहायता देने की घोषणा की है. सहायता राशि उन्हें बीजापुर के कलेक्टर कार्यालय से दी जायेगी.

बस्तर कमिश्नर दिलीप वासनीकर, बीजापुर कलेक्टर अय्याज तम्बोली और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने ग्राम केतुलनार पहुंचकर दोनों दिवंगत बच्चों के परिवारों से मुलाकात की और उनके प्रति संवेदना प्रकट की.

उन्होंने दोनों बच्चों के परिवारों को तात्कालिक रूप से दस-दस हजार रूपए की सहायता प्रदान की.

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