छत्तीसगढ़ को सूखा घोषित करो: माकपा

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ माकपा ने पूरे प्रदेश को सूखाग्रस्त घोषित कर व्यापक पैमाने पर राहत के कदम उठाने की मांग की है. इस मांग पर दो माह के राज्यव्यापी अभियान के बाद सोमवार रायपुर में राज्यस्तरीय धरना का आयोजन किया गया है.

आज यहां जारी एक बयान में माकपा के छत्तीसगढ़ राज्य सचिव संजय पराते ने अवर्षा, कम वर्षा तथा कुसमय वर्षा के चलते पूरे प्रदेश में सूखा पड़ने के बावजूद भाजपा राज्य सरकार और प्रशासन के मूकदर्शक बने रहने की तीखी निंदा की है.

पार्टी ने कहा है कि राज्य सरकार के पास न कोई नीति है और न ही नीयत, जिसके कारण पिछले दो माह में एक दर्जन से ज्यादा किसान और आदिवासी आत्महत्या और भुखमरी के शिकार हुए हैं. सूखे को देखने के लिए आये केन्द्रीय दल के सामने भी सरकार की नाकामी स्पष्ट रूप से सामने आई है. यदि सरकार अब भी नहीं चेती, तो प्रदेश में किसान आत्महत्याओं की बाढ़ आ जाएगी.

माकपा नेता ने कहा है कि पूरे प्रदेश में किसान आंदोलित हैं कि उनके गांवों में कोई राहत कार्य नहीं खोले गए हैं. हकीकत यह है कि मनरेगा के दो वर्ष पूर्व के भी बकाये की अदायगी फण्ड के अभाव में नहीं की जा रही है. किसानों ने अपने प्रयासों से जो फसल बचा ली है, उसे खरीदने कि भी कोई सरकारी व्यवस्था नहीं की गई है, जिसके कारण हालात ऐसे हैं कि दीपावली में दीये भी न जले.

पराते ने कहा कि पूरे प्रदेश में व्यापक पैमाने पर मनरेगा का काम शुरू करने व बकाया मजदूरी का भुगतान करने, किसानों का एक-एक दाना धान 300 रूपये बोनस सहित 2400 रूपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदने, सभी किसानों को 10000 रूपये प्रति एकड़ राहत राशी देने, बंटाईदारों, खेतमजदूरों व ग्रामीण शिल्पकारों को प्रति परिवार 10000 रूपये मुआवजा देने, किसानों पर बकाया बिजली बिल तथा कर्जे माफ़ करने, प्रदेश के सभी परिवारों को प्रति माह राशन दुकानों से 35 किलो अनाज देने, भुखमरी से होने वाली मौतों और आत्महत्या से पीड़ित परिवारों को 10 लाख रूपये मुआवजा देने, पेयजल व पशुचारे की व्यवस्था करने, जल स्रोतों और जल संसाधनों के औद्योगिक-व्यापारिक दोहन पर रोक लगाने आदि मांगों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए सोमवार राज्यस्तरीय धरने का आयोजन किया गया है.

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