बच्चों पर अपराध में छत्तीसगढ़ आगे

रायपुर | संवाददाता: बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले में छत्तीसगढ़ देश में आगे निकल गया है. यही हाल राजधानी रायपुर का है. देश के 30 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को पीछे छोड़ते हुये छत्तीसगढ़ बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले में पांचवें नंबर पर है. देश में कुल 28 राज्य और 7 केंद्र शासित प्रदेश हैं.

केन्द्रीय अपराध अनुसंधान ब्यूरो द्वारा जारी 2012 की रिपोर्ट बताती है कि छत्तीसगढ़ में बच्चों के खिलाफ पिछले साल 1881 अपराध हुए हैं. ये आकड़े दर्ज अपराधो के ही हैं. इसके अलावा माना जाता है कि इससे अधिक मामले सामाजिक दबाव, प्रलोभन या भय के कारण दर्ज ही नहीं हो पाते.

बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले में पहला मध्यप्रदेश का है, जहां 5168 अपराध पंजीकृत हुए. दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र 3456, तीसरे स्थान पर बिहार 2894, चौंथे स्थान पर आंध्रप्रदेश है. इससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि छत्तीसगढ़ में कम से कम विकास की लहर बच्चों तक नहीं पहुच पाई है. वे आज भी इस विकसित समाज में अत्याचार के शिकार हैं.

यदि महानगरों में बच्चों पर हुए आंकड़ों को लिया जाये तो देश के 28 महानगरों तथा शहरो में छत्तीसगढ़ का दुर्ग-भिलाई छठवें स्थान पर है. राज्य की राजधानी रायपुर आठवें स्थान पर है. दुर्ग-भिलाई में वर्ष 2012 में बच्तो पर हुए अपराध के 268 मामले दर्ज किये गये हैं. इसकी तुलना में कोलकाता में 224 तथा नागपुर में 222 अपराध हुए हैं.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर 204 अपराधो के साथ आठवें स्थान पर है. सबसे ज्यादा अपराध देश की राजधानी दिल्ली में हुए हैं. जिसकी संख्या 3635 है.

केन्द्रीय अपराध अनुसंधान ब्यूरो के अनुसार इन अपराधो में शिशु हत्या, हत्या, बलात्कार, अपहरण, भ्रूण हत्या, आत्महत्या के लिये उकसाना, परीत्याग कर देना तथा देह व्यापार के लिये बच्चियों को खरीदना एवं बेचना शामिल है.

छत्तीसगढ़ में बच्चो पर हुए अपराध के 10.2 प्रतिशत मामलों की जांच अभी तक बाकी है.

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