हिरासत में मौत, आज जांजगीर बंद

रायपुर | समाचार डेस्क: हिरासत में दलित की मौत के खिलाफ आज जांजगीर बंद किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने शुक्रवार को मुलमुला थाने में पुलिस पिटाई से नरियरा के दलित युवक सतीश नोर्गे की मौत के खिलाफ सोमवार को सभी जिला एवं ब्लॉक मुख्यालयों में धरने का भी एलान किया है. रविवार को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री निवास के सामने प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल के नेतृत्व में धरने दे रहे कांग्रेसियों को गिरफ्तार कर लिया गया था.

रविवार को ही मरवाही के विधायक अमित जोगी ने नरियरा में चक्का जाम में भाग लिया था. आज सोमवार को छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल जांजगीर पहुंच रहे हैं.


उधर, राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री रमन सिंह ने घटना की निष्पक्ष जांच के आदेश दे दिये हैं. उन्होंने मृतक के परिवार के लिये 1 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की है. जिला प्रशासन ने भी मृतक सतीश नोर्गे के परिवार को 25 हजार रुपयों की तात्कालिक सहायता दी है. प्रशासन ने सतीश नोर्गे की मृत्यु समीक्षा के लिये न्यायिक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति के लिये पत्र लिखा है.

शुक्रवार को ही जांजगीर-चांपा के पुलिस अधीक्षक अजय यादव ने मुलमुला थाने के उप निरीक्षक जितेन्द्र सिंह राजपूत को निलंबित कर दिया था. उसके बाद रविवार को पुलिस अधीक्षक द्वारा उसी थाने के दो आरक्षक सुनील ध्रुव एवं दिलहरण मिरी के निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया है. जिला कलेक्टर ने मृतक सतीश नोर्गे की पत्नी को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है.

रविवार को मृतक के परिजन तथा गांव वाले आरोपी पुलिस अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने पर अड़े रहे. आखिर में थाना प्रभारी जितेन्द्र सिंह राजपूत सहित तीन अन्य के खिलाफ रोजनामचे में शिकायत दर्ज की गई उसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराने दिया गया है.

क्या कहते हैं आकड़े-
सरकारी आकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति की जनसंख्या 32.7 लाख है. पिछले साल अनुसूचित जाति तथा जनजाति के 6 लोगों की हत्या की गई थी. जिसकी दर 0.2 है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यही आकड़ा 0.4 का है. इसी तरह से पिछले साल 6 अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लोगों की हत्या की कोशिश की गई थी. जिसकी दर राज्य में 0.2 है तथा राष्ट्रीय स्तर पर यह 0.3 है.

साल 2015 में अनुसूचित जाति तथा जनजाति के 81 महिलाओं के साथ रेप किया गया था. जिसकी दर राज्य में 2.5 है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 1.2 की दर से है. इसी तरह से अनुसूचित जाति के 33 महिलाओं पर उनके शीलभंग करने के इरादे से हमले किये गये तथा 7 की यौन प्रताड़ना के केस दर्ज किये गये.

सरकारी आकड़ों के अनुसार पिछले साल पुलिस अभिरक्षा में छत्तीसगढ़ में 4 मौतें हुई थी. जिनमें से 2 के खिलाफ मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिये गये तथा 2 की न्यायिक जांच की गई. उल्लेखनीय है कि इनमें 3 मामले में पुलिस अभिरक्षा में ही आत्महत्या की गई थी. 1 मामले में अन्य कारणों से मौत हुई थी.

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