छत्तीसगढ़ को मिले विशेष राज्य का दर्जा

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ ने केंद्र सरकार से विशेष राज्य का दर्जा मांगा है. सोमवार को दिल्ली में वित्त मंत्रियों की बैठक में छत्तीसगढ़ के वाणिज्यिक कर व स्वास्थ मंत्री अमर अग्रवाल ने विशेष राज्य के पक्ष में कई तर्क रखे.

अमर अग्रवाल ने कहा कि योजना आयोग के 2011 में प्रकाशित भारत मानक विकास प्रतिवेदन यानी आईएचडीआर के अनुसार मानव विकास सूचकांक के आधार पर छत्तीसगढ़ देश सबसे पिछड़ा हुआ राज्य है. एनएसएसओ द्वारा वर्ष 2013 में प्रकाशित गरीबी सर्वेक्षण के अनुसार छत्तीसगढ़ में बीपीएल परिवारों का अनुपात देश में सबसे अधिक 39.9प्रतिशत है. इसी प्रकार रघुराम राजन कमेटी के प्रतिवेदन 2013 के अनुसार छत्तीसगढ़ सबसे कम विकसित राज्यों में से एक है. इसके अतिरिक्त प्रदेश के आधे से अधिक जिले नक्सल उग्रवाद से प्रभावित है.

गौरतलब है कि विगत तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ को प्राप्त होने वाले केन्द्रीय करों में राज्य के हिस्से में लगभग 800 करोड़ की कम राशि प्राप्त हुई है. केन्द्र से राज्य ने इस कमी की पूर्ति अन्य स्त्रोतों से किये जाने की मांग की.

बैठक में केन्द्र का ध्यान आकृष्ट कराते हुए अमर अग्रवाल ने कहा कि वर्ष 2005-06 में वेट प्रणाली लागू होने के पश्चात् 2007-08 में केन्द्रीय विक्रय कर की दर को 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत किया गया था. इससे राज्यों को होने वाली राजस्व हानि की प्रतिपूर्ति 5 वर्षों तक केन्द्र सरकार द्वारा करने की सहमति हुई थी. लेकिन 3 वर्ष के पश्चात यह प्रतिपूर्ति बंद कर दी गई. इस बाबत् छत्तीसगढ़ को केन्द्र सरकार से 3085 करोड़ प्राप्त होना शेष है. इस संबंध में केन्द्र सरकार से लगातार मांग की गई है. अतः वर्ष 2014-15 के बजट में इस बाबत् प्रावधान किया जाना चाहिए.

छत्तीसगढ़ ने केन्द्र से राज्यों को सेवा कर अधिरोपित करने का अधिकार दिये जाने की भी मांग केन्द्र सरकार से की . राज्य के कैम्पा के अंतर्गत प्राप्त होने वाली राशि के संबंध में केन्द्र का ध्यान आकृष्ट कराते हुए बताया कि माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश पर केन्द्रीय स्तर पर संधारित तदर्थ कैम्पा निधि में राज्य द्वारा कुल लगभग 2500 करोड़ जमा कराया गया है तथा इस पर 600 करोड़ का ब्याज भी अर्जित हुआ है और इसमें प्रति वर्ष उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है. लेकिन माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार इसमें से प्रत्येक राज्य को उसके द्वारा जमा मूल राशि का मात्र 10 प्रतिशत वर्ष (गत वर्ष तक 5 प्रतिशत) दिया जाता है.

अमर अग्रवाल ने कहा कि इस प्रकार 3100 करोड़ जमा होते हुए भी आज तक राज्य को मात्र 600 करोड़ प्राप्त हुआ है. इस शेष 2500 करोड़ में से इस वर्ष भी मात्र 2500 करोड़ मिलेगा. यहाँ पर यह उल्लेखनीय है कि इस मद में जमा राशि का एक बड़ा हिस्सा राज्य सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा जमा किया गया है एवं इस राशि का उपयोग वनों के पुनरोद्धार, वृक्षारोपण तथा पर्यावरण सुधार के लिए किया जाना है. अतः इस राशि का उपयोग बिना किसी प्रतिशत सीमा के व्यापक वनीकरण और पर्यावरण सुधार के लिए हो पाये इस हेतु केन्द्र सरकार द्वारा वर्तमान में माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार स्थापित तदर्थ (एड हॉक) कैम्पा निधि के बजाय अधिनियम बनाकर नियमित कैम्पा की स्थापना की जानी चाहिए.

इस बैठक में श्री अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ में नक्सली समस्या को विशेष ध्यान में रखते हुए पुलिस आधुनिकीकरण तथा एसआरई मदों के आबंटन में भी वृद्धि की मांग केन्द्र सरकार से की. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार राज्य में विकास की खाई की पूर्ति हेतु आवश्यक अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए ऋण लेने की सीमा जो कि जीएसडीपी का 3 प्रतिशत नियत है, में छूट दी जाए. छत्तीसगढ़ को कुल ऋणभार तथा ब्याज भुगतान अन्य राज्यों की तुलना में सबसे कम है. इसे ध्यान में रखते हुए एफआरबीएम एक्ट में संशोधन हेतु केन्द्र सरकार की सहमति दी जाए. राज्य ने केन्द्र सरकार से ग्रामीण इलाकों में बैंकों की शाखाओं में वृद्धि किये जाने की मांग की है. ताकि मजदूरी भुगतान में हो रहे विलंब को दूर किया जा सके. राज्य ने केन्द्र से फ्लाई एश ब्रिक्स पर देय केन्द्रीय उत्पादन शुल्क को समाप्त किये जाने का भी अनुरोध किया है.

बैठक में केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के अलावा दूसरे राज्यों के वित्त मंत्री भी उपस्थित थे. छत्तीसगढ़ के अपर मुख्य सचिव वित्त डीएस मिश्रा ने भी बैठक में भाग लिया.

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