छत्तीसगढ़ में बाल विकास अधिकारियों को पुलिस का अधिकार

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग ने दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 और छत्तीसगढ़ दहेज प्रतिषेध अधिनियम 2004 के क्रियान्वयन के लिए राज्य के नौ नए जिलों के विभागीय जिला अधिकारियों सहित सभी बाल विकास परियोजना अधिकारियों को दहेज प्रतिषेध अधिकारी घोषित कर दिया है.

इन नौ नए जिलों में बलौदाबाजार-भाटापारा, बालोद, बलरामपुर-रामानुजगंज, बेमेतरा, गरियाबंद, मुंगेली, सूरजपुर, कोण्डागांव और सुकमा जिला शामिल हैं. इन नौ जिलों के अलावा राज्य के अन्य 18 जिलों में पूर्व में दहेज प्रतिषेध अधिकारी घोषित किए जा चुके हैं. इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक दिलीप वासनीकर ने परिपत्र जारी कर दिया है.


परिपत्र में कहा गया है कि दहेज प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन से बाल विवाह को रोकने में भी मदद मिलेगी. दहेज प्रतिषेध अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए दहेज प्रतिषेध अधिकारियों को पुलिस अधिकारी की शक्तियां प्रदान की गई है. आवश्यकता होने पर दहेज प्रतिषेध अधिकारी इन शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं.

परिपत्र के माध्यम से दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 की धारा 8 (बी)(2) के अनुसार दहेज प्रतिषेध अधिकारी के दायित्व तथा छत्तीसगढ़ दहेज प्रतिषेध अधिनियम 2004 के नियम 5 के अनुसार दहेज प्रतिषेध अधिकारी द्वारा पालन किए जाने वाले अतिरिक्त कार्यों के अनुसार कारवाई करने के निर्देश दिए गए हैं. दहेज प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों के बारे में लोगों को जानकारी प्रदान करने के लिए 26 नवम्बर 2014 को प्रत्येक विकासखण्ड में कार्यशाला सह विधिक जागरूकता शिविर के आयोजन के लिए आवश्यक तैयारी करने के निर्देश दिए गए है.

इसके अलावा 26 नवम्बर को प्रदेश के सभी स्कूलों और महाविद्यालयों में दहेज न लेने-देने की शपथ दिलाने और इसके लिए स्थानीय महाविद्यालयों एवं विद्यालयों से समन्वय कर आवश्यक कारवाई सुनिश्चित करने के लिए भी निर्देशित किया गया है. परिपत्र में दिए गए निर्देशों के अनुसार जिलों में होने वाले प्रत्येक विवाह में वर-वधु को दी जाने वाली उपहार सामग्री की सूची दहेज प्रतिषेध अधिकारियों को अपने कार्यालय में अनिवार्य रूप से रखना होगा. प्रत्येक विवाह में पक्षकारों को उपहारों की सूची विवाह समाप्ति के एक माह के भीतर संबंधित दहेज प्रतिषेध अधिकारी को अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा. यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि पक्षकारों को इस प्रावधान की आवश्यक रूप से जानकारी हो तथा उपहार सामग्री का विवरण निर्धारित प्रारूप में प्राप्त किया जाए.

परिपत्र में यह भी कहा गया है कि वास्तविक सामग्री में अंतर होने का अंदेशा होने पर दहेज प्रतिषेध नियम के उपनियम 5 के अनुसार स्थल पर जाकर सत्यापन करना चाहिए. अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन की दशा में अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार समुचित कारवाई कर प्रतिवेदन सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत करना चाहिए. प्रत्येक विकासखण्ड में पंजी संधारित कर प्राप्त उपहारों की सूची का विवरण दर्ज किया जाए और प्राप्त दस्तावेज नस्ती में रखे जाए. दहेज संबंधी शिकायत प्राप्त होने पर शिकायत पंजी में प्रारूप-1 के अनुसार विवरण दर्ज करना होगा तथा प्रारूप-2 के अनुसार उसका त्रैमासिक विवरण मुख्य दहेज प्रतिषेध अधिकारी को प्रस्तुत करना होना.

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