सूखा राहत पर केंद्र ने पानी फेरा

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ को सूखा राहत के नाम पर केंद्र ने झुनझुना पकड़ा दिया है. केंद्र में भाजपा सरकार होने के बाद माना जा रहा था कि राज्य को अधिक से अधिक सहायता मिलेगी लेकिन केंद्र से मिलने वाली रकम उंट के मुंह में जीरा की तरह साबित हुई है. केंद्र सरकार ने इन तीनों राज्यों को इतनी रकम भी नहीं दी है कि किसानों को भी मुआवजा बांटा जा सके.

केंद्र ने 2017-18 में देश में केवल तीन राज्यों को सूखा राहत की रकम जारी की. इन तीनों ही राज्यों छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में भाजपा की सरकार है लेकिन इसके बाद भी तीनों राज्यों को मिली रकम ने सूखा राहत पर सवाल खड़े कर दिये हैं.


छत्तीसगढ़ सरकार ने 27 में से 21 ज़िलों को सूखा प्रभावित घोषित किया था और केंद्र सरकार की टीम के पूरे सर्वेक्षण के बाद उसे उम्मीद थी कि सूखा राहत के नाम पर उसे इतनी रकम तो मिल ही जायेगी, जिससे किसानों को राहत मिल पायेगी.

देश के कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार 2017-18 में छत्तीसगढ़ के 21 ज़िले सूखा प्रभावित घोषित किये गये थे. इसी तरह मध्यप्रदेश के 18 और राजस्थान के 13 जिलों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया था.

सूखा राहत के मद में छत्तीसगढ़ ने 4401.00 करोड़ रुपये की मदद केंद्र सरकार से मांगी थी. इसी तरह मध्यप्रदेश और राजस्थान ने भी सूखा प्रभावित इलाकों में कल्याणकारी योजनाओं के लिये केंद्र सरकार से क्रमशः 3705.95 करोड़ और 3078.26 करोड़ मांगे थे.

छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र से जो 4401.00 करोड़ रुपये की मदद मांगी थी, इसमें 1500 करोड़ रोजगार गारंटी योजना के लिये मांगी गई थी. इसके अलावा 1307 करोड़ रुपये किसानों की फसल क्षतिपूर्ति के लिये मांगी गई थी. राज्य के सूखा प्रभावित 96 तहसीलों में सरकार ने कई योजनायें चलाने का निर्णय लिया था.

लेकिन केंद्र ने राज्य सरकार की सूखा राहत योजनाओं पर पानी फेर दिया. छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि से मांगे गये 4401.00 करोड़ रुपयों में से दस फीसदी रकम भी नहीं मिली. छत्तीसगढ़ को महज 395.31 करोड़ रुपये ही सहायता के रुप में अनुमोदित किये गये. यह रकम किसानों को फसलों की क्षतिपूर्ति के लिये मांगी गई 1307 करोड़ की भी लगभग एक चौंथाई थी.

इसी तरह मध्यप्रदेश को 3705.95 करोड़ में से 836.09 करोड़ ही अनुमोदित किये गये. सबसे बुरा हाल राजस्थान का रहा. जिसने 3078.26 करोड़ रुपये सूखा राहत के मद में मांगे थे लेकिन केंद्र ने उसे अब तक फूटी कौड़ी भी जारी नहीं की है. मामला अभी तक विचाराधीन है.

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