नक्सली क्षेत्र में नेत्रहीनो को चुनाव ड्यूटी

जगदलपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के लिए इस बार निर्वाचन आयोग ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र में ऐसे लोगों की भी चुनाव ड्यूटी लगा दी है, जो नेत्रहीन हैं. सूबे के बस्तर ब्लाक में तो एक नेत्रहीन शिक्षक ने चुनाव का प्रशिक्षण भी ले लिया है. शिकायतों के बाद अब अफसर आनन-फानन में ड्यूटी निरस्त करने की तैयारी कर रहे हैं.

बताया जाता है कि मतदान दलों के लिए सभी कार्यालयों से कर्मचारियों की सूची मंगवाई गई थी. इन दलों में सबसे ज्यादा संख्या शिक्षक व शिक्षाकर्मियों की है, जिनकी सूची संबंधित ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारियों ने भेजी थी. वहां से जो सूची जिला निर्वाचन कार्यालय को मिली उसी के आधार पर सीधे तौर पर कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी गई है.


कलेक्टोरेट की ओर से सभी बीईओ को कहा गया था कि वे विकलांग, नेत्रहीन, गंभीर बीमारी से पीड़ित, लंबे समय से अनुपस्थित और इसी तरह के कर्मचारी जो ड्यूटी करने में असमर्थ हों, उन्हें सूची से अलग कर इनकी जानकारी दी जाए. लेकिन वहां से अंतिम समय तक कर्मचारियों की सूची भेजने में समस्या आई है. इसलिए कुछ विकलांगों तक की ड्यूटी लगने की खबर है.

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, बस्तर ब्लॉक के सोनारपाल प्राइमरी स्कूल में पदस्थ सहायक शिक्षक, पंचायत के पद पर पदस्थ नेत्रहीन दीपक कुमार सोनी की ड्यूटी मतदान दल अधिकारी क्रमांक 3 के रूप में लगाई गई है. इस कर्मचारी ने गुरुवार को बस्तर में मतदान का प्रशिक्षण भी ले लिया है.

प्रशिक्षण के लिए इसकी पत्नी इसे लेकर पहुंची थी. उसने बताया कि ड्यूटी निरस्त करने के लिए वह आवेदन कर चुकी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है, न ही इसकी कोई जानकारी मिली है.

इस संबंध में बस्तर के उप जिला निर्वाचन अधिकारी एमएस रघुवंशी का कहना है कि जिला कार्यालय को उपलब्ध कराई गई सूची के आधार पर ड्यूटी लगाई गई है. यदि किसी नेत्रहीन अथवा ऐसे व्यक्ति की ड्यूटी लगाई गई है जो कार्य संपादित करने में असमर्थ है तो उसे बदल दिया जाएगा.

बहरहाल, चुनाव कार्य में लगे निर्वाचन अफसरों की लापरवाही का खामियाजा एक नेत्रहीन कर्मचारी को भुगतना पड़ रहा है.

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