सरप्लस बिजली, फिर कटौती क्यों ?

रायपुर | संवाददाता: गर्मी बीत जाने के बाद भी छत्तीसगढ़ में बिजली की कटौती जारी है. ऐसा नहीं है कि छत्तीसगढ़ में बिजली की कोई कमी है. इससे यह सवाल उठता है कि फिर बिजली की कटौती क्यों की जा रही है. बिजली की कटौती से रूबरू होने के लिये छत्तीसगढ़ के रायपुर से लेकर बिलासपुर किसी शहर का दौरा किया जा सकता है. इन शहरों में बात-बात पर बिजली चली जाती है.

छत्तीसगढ़ में बिजली की स्थिति सरप्लस है. पिछले दो दिनों से राज्य में बिजली की मांग पीक अवर्स में 2800 मेगावाट के करीब थी, तो बिजली की उपलब्धता 3000 मेगावाट के करीब रही. शनिवार को संध्या 6.30 बजे राज्य में बिजली की उपलब्धता 3 हजार मेगावाट के करीब थी, जबकि खपत 2800 मेगावाट हो रही थी. रविवार को दिन में भी 2400 मेगावाट बिजली की मांग थी, जबकि उपलब्धता 2550 मेगावाट के करीब थी.


छत्तीसगढ़ में पिछले कई माह से वितरण विभाग द्वारा घंटों बिजली बंद कर मेंटेनेंस व रखरखाव का कार्य किया गया. कार्य किस ढंग से हो रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मेंटेनेंस के बाद भी जरा सा हवा और पानी गिरने पर बिजली बंद हो रही है और घंटो शुरू नहीं हो रही है. स्थिति यह हो गई है कि बिना किसी कारणवश भी विद्युत आपूर्ति बंद कर दी जाती है.

सबसे बुरा हाल मध्यम वर्ग के लोगों का है. जिनके घरों में इनवर्टर की महंगी सुविधा का अभाव है. ऐसे में बिजली कटौती के बीच में ही घर का काम-काज चलाना पड़ रहा है. शाम के बाद कब बिजली चली जाये, उसके डर से दोपहर बाद ही रात का खाना पकाने में गृणहियां बुद्धिमानी का काम मानती है. कम्प्यूटर से चलने वाले सारे काम बिजली चली जाने से थम से जाते हैं.

बिलासपुर जैसे शहर में रात को घर लौटते वक्त जब बिजली नहीं रहती है तो टटोल-टटोल कर चलना पड़ता, न जाने कौन कब अंधेरे में किस गढ्ढे में आप समा जायें. बिजली की कटौती का सबसे विपरीत असर स्वास्थ्य सेवाओं तथा शिक्षा पर पड़ता है.

ग्रामीण क्षेत्रों में तो बिना पूर्व सूचना दिए एकाएक बिजली बंद कर दी जाती है. अघोषित विद्युत कटौती ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार जारी है. सरकार ग्रामीण इलाकों में किसानों को मुफ्त बिजली का दावा लाख करे, हकीकत ये है कि गांव में बिजली ही नहीं रहती. कई इलाके इस 21वीं सदी में भी लो वोल्टेज की समस्या से जूझ रहे हैं.

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