छत्तीसगढ़: हाथियों ने ग्रामीणों को मारा

कोरबा | अब्दुल असलम: छत्तीसगढ़ के कोरबा के करतला वन परिक्षेत्र एक बार फिर हाथियों के आतंक से थर्रा उठा है. हाथियों ने ग्राम चांपा में एक मकान को ध्वस्त कर दिया. मकान में सो रहे दंपति पर हाथियों ने हमला कर दिया. पति को कुचल कर मौत के घाट उतार दिया. पत्नी हाथियों के हमले में गंभीर रूप से आहत हो गई है. जिसे करतला सीएचसी में भर्ती कराया गया है. चांपा के बाद कल्गामार के काजूडोंगरी जंगल में हाथियों ने एक वृद्घ को कुचल दिया. घटना की सूचना मिलते ही वन अमला मौके पर पहुंचा. ग्रामीणों में हाथियों के आतंक को लेकर दहशत व्याप्त है.

हाथियों ने छत्तीसगढञ के कोरबा के करतला वन परिक्षेत्र के ग्राम चांपा में रात्रि 12.30 बजे धावा बोल दिया. गांव में निवासरत उज्जैन सिंह राठिया पिता रंजीत सिंह राठिया 55 वर्ष के मकान को हाथियों ने ढहा दिया. हाथियों के हमले से घर पर सो रहे दंपति उज्जैन सिंह राठिया व उसकी पत्नी दिल कुंवर राठिया 50 वर्ष भागने का प्रयास करने लगे. लेकिन हाथियों ने दंपति को दबोच लिया. हाथियों के हमले में उज्जैन सिंह राठिया की मौके पर ही मौत हो गई. जबकि पत्नी दिल कुंवर गंभीर रूप से घायल हो गई. महिला को मृत समझकर हाथी मौके से जंगल की ओर रवाना हो गए. लगभग एक घंटे तक हाथियों ने ग्राम चांपा में आतंक मचाया. रात में हाथियों द्वारा आतंक मचाए जाने की सूचना आसपास के ग्राम में भी फैल चुकी थी. आसपास के गांवों में भी हाथियों का खतरा बना हुआ था. सुबह लगभग 6 बजे हाथियों ने एक बार फिर ग्राम चांपा से एक किलोमीटर दूर स्थित कल्गामार के जंगल काजूडोंगरी में दस्तक दे दी. यहां कल्गामार निवासी गांधीराम राठिया पिता थान सिंह राठिया 60 वर्ष डोरी बिनने गया हुआ था. हाथियों ने गांधी राम राठिया को भी पटक-पटक कर मौत के घाट उतार दिया. हाथियों के आतंक से करतला क्षेत्र के ग्रामीण सहमे हुए है. वन अमला भी करतला के प्रभावित ग्रामों में पहुंचकर हाथियों को खदेडऩे के प्रयास में जुटा हुआ है.

महुआ शराब बनाता था मृतक
चांपा में रहने वाला मृतक उज्जैन सिंह राठिया महुआ शराब बनाकर बेचने का काम करता था. उसके घर से महुआ की तेज गंध आती थी. बताया जाता है कि महुआ शराब की उसी गंध को पाकर हाथी मदमस्त हो गए और उज्जैन सिंह के घर को तोड़कर महुआ खाने का प्रयास करने लगे. इसी घटना में दंपति भी हाथियों की चपेट में आ गए. वन विभाग द्वारा ऐसे लोगों को महुआ शराब बनाने से मना करने अलर्ट जारी किया गया है.

बाड़ी के रास्ते से आए भीतर
मृतक उज्जैन सिंह के बाड़ी के रास्ते से हाथियों ने प्रवेश किया. पहले बाड़ी में ही महुआ की तलाश हाथियों ने की. लेकिन जब महुआ नहीं मिला तो हाथियों ने मकान ढहाना शुरू कर दिया.

तीन लोगों की हुई थी मौत
दो माह पूर्व हाथियों ने करतला वन परिक्षेत्र के ग्राम चारमार व चोरभट्टी में आतंक मचाते हुए मान कुंवर, कमला बाई व दिल कुंवर को मौत के घाट उतारा था. इसके अलावा 15 जून की रात्रि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के कुदमुरा प्रवास से पहले हाथियों ने करतला सीएचसी की दीवार ढहा कर आम व केलों के पेड़ों को चट कर दिया था. राहुल गांधी से हाथी प्रभावित ग्रामीणों ने चर्चा कर अपना दुखड़ा भी बताया था. अब देखना है कि राहुल गांधी क्या दिल्ली में हाथी प्रभावितों की आवाज बुलंद कर पाते हैं.

और हो गई देर…
हाथियों के आतंक की खबर करतला वन परिक्षेत्र के ग्रामों में फैल चुकी थी. कल्गामार में भी हाथी आने की खबर ग्रामीणों को मिल चुकी थी. इसके बावजूद कल्गामार निवासी गांधी राम राठिया पास के जंगल काजूडोंगरी में डोरी बीज बिनने गया था. जब इस बात का पता उसके पुत्र चंदन सिंह को चला तो वह भागते हुए कल्गामार जंगल गया. लेकिन तब तक देर हो चुकी थी. हाथियों ने उसके पिता गांधीराम को मौत के घाट उतार दिया था.

ग्रामीणों में शोक व दहशत
हाथियों के हमले में मृत लोगों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. ग्रामीण भी शोक व दहशत के साए में है. हालांकि वन विभाग ने ग्रामीणों के जंगल की ओर जाने पर रोक लगा दी है. लेकिन हाथी कभी भी गांव की ओर पुन: प्रवेश कर सकते हैं. हाथियों की दहशत से ग्रामीणों की निंद उड़ गई है.

नेटवर्किंग सिस्टम फेल
उल्लेखनीय है कि कोरबा जिले के वन्य परिक्षेत्रों में हाथियों का आतंक कोई नई बात नहीं है. इससे पहले भी हाथियों के हमले में कई लोगों की मौत हो चुकी है. हाथियों ने फसल व कई घरों को नुकसान पहुंचाया है. वन विभाग द्वारा एलीफेंट ट्रैकिंग की शुरूआत किए जाने की बात कही जाती है. लेकिन अब तक ट्रैकिंग सिस्टम का पुरा नेटवर्क धरातल पर नहीं आ पाया है. वन विभाग का ट्रैकिंग सिस्टम फेल हो चुका है. यहीं वजह है कि ट्रैकिंग सिस्टम काम नहीं कर पा रहा है. बताया जाता है कि कोरबा वन मंडल में कुछ ही अधिकारियों को मोबाइल दी गई है. जबकि निचले स्तर के कर्मचारियों को मोबाइल नहीं दिया गया है. जब तक सभी के पास मोबाइल नहीं होगा तब तक सिस्टम पर काम कर पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है.

—हाथी के हमले में मृत ग्रामीण

वर्ष मृतक ग्राम
2000 सुखलाल छुईडोढ़ा
2001 जेठ सिंह सरसादेवा
2002 कर्मा राम तराईमारडीह
2003 फूल साय केऊबहरा
2006 लोहारिन बाई कोरकोमा
2006 जोतराम कलमीटिकरा
2006 सम्मन कुंवर बड़मार
2007 मुखी सिंह गिधौरी
2007 रामचरण नोनबिर्रा
2007 नारायण कुदमुरा
2007 संत कुंवर नोनदरहा
2007 फूल सिंह हिगनझरिया
2007 मान कुंवर तरईमारडीह
2007 शनिश्चर दास कुदमुरा
2007 मंगलाई गोढ़मा
2008 गुरुवारी बाई कचांदी
2008 सुमित्रा बाई कचांदी
2008 बंदेलाल चचिया
2008 घसनिन बाई रगनढहा
2008 सुखदेव ठाकुरखेता
2009 आशो बाई धौराभाठा
2010 कंठीराम जोगीपाली
2011 अर्जुन सिंह तरईमारडीह
2013 गेंद सिंह कछार
2013 रतन सिंह ढेंगुरडीह
2013 कु. शशि जिल्गा
2013 आकाश बाई गिरारी
2014 बुधवारी बाई पुटामुड़ा
2014 गुलाब सिंह मांड नदी
2015 मान कुंवर चारमार
2015 कमला बाई चोरभट्टी
2015 दिलकुंवर चारमार
2015 शंभू मानिकपुरी खोडरी
2015 बुढिय़ा बाई ढेलवाडीह
2015 उज्जैन सिंह राठिया-चांपा
2015 गांधीराम राठिया कल्गामार

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