स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स बन गया ट्रांजिट हॉस्टल

रायपुर | संवाददाता: दंतेवाड़ा में एस्सार कंपनी के सीएसआर फंड से ट्रांजिट हॉस्टल बनाया गया है. जिसका मुख्यमंत्री रमन सिंह के हाथों उद्घाटन होना है. एस्सार कंपनी की कार्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी मद से 6 करोड़ तीन लाख रुपये में यहां स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स की नींव रखी गई थी. लेकिन जनता के नाम पर खर्च होने वाली इस रक़म से सरकार ने अफसरों और उनके अतिथियों के लिये ट्रांजिट हॉस्टल बना डाला.

यह बस्तर संभाग का प्रथम छह मंजिला भवन है. इस हास्टल में बाहर से आने वाले अफसरों और उनके अतिथियों के लिए विलासिता से पूर्ण कमरों में ठहरने और खाने का इंतजाम किया गया है.

दंतेवाड़ा जिले में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम और एस्सार दो कंपनियों का काम चल रहा है. इससे प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए प्रशासन को मिलते हैं. इस राशि से कंपनियों की आय के एक हिस्से को नैगमिक सामाजिक दायित्व के तहत लोकहित में व्यय किया जाना है. दंतेवाड़ा में सीएसआर के पैसे से एजुकेशन सिटी जैसा निर्माण भी हुआ है. जिसमें लोकहित सीधे दिखाई दे रहा है.

लेकिन ताज़ा तरीन बनाये गये ट्रांजिट हॉस्टल ने लोकहित की परिभाषा बदल कर रख दी है. एस्सार के सूत्रों का कहना है कि प्रशासन ने स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा, जिसमें जिले के खिलाड़ियों को ठहरने और अन्य व्यवस्थाओं का जिक्र है. मेमोरंडम आफ अंडर स्टैंडिंग में इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख है. इस स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स की बुनियाद पूर्व कलेक्टर ओम प्रकाश चौधरी के कार्यकाल में रखी गई थी.

श्री चौधरी के तबादले के बाद जिला प्रशासन ने निर्माण पूरा होते तक पूरा कान्सेप्ट ही परिवर्तित कर दिया. अब इसे ट्रांजिट हास्टल के रूप में नई पहचान दी गई है. इस हास्टल में विलासिता की तमाम व्यवस्थाएं हैं. जो आने वाले अफसरों को तो लुभाएंगी ही, साथ ही पैसे वालों को उनकी कीमत पर सुविधाएं प्रदान करेंगी. बड़ी बात यह है कि सीएसआर की फंडिंग के दुरूपयोग को लेकर जिला स्तर पर सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के मुताबिक एक कमेटी भी है, जिसके प्रमुख ​डीएम यानी जिला कलेक्टर को ही हैं. ऐसी स्थिति में इस दुरूपयोग की शिकायत किससे की जाए और कौन करे वाली स्थिति निर्मित हो गई है.


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