छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री की यह कैसी ‘इज्जत’

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री इज्जत कार्ड को लेकर सवाल खड़े हो गये हैं. मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक इज्जत कार्ड योजना द्वारा जिस तरीके से मजदूरों को लाभार्थी बनाने का प्रचार किया जा रहा है, वास्तव में यह छलावा से अधिक कुछ नहीं है.

छत्तीसगढ़ में हाल ही में लागू की गई मुख्यमंत्री इज्जत कार्ड योजना में भवन निर्माण में लगे मजदूरों को मुफ्त में रेल्वे यात्रा करने की इज्जत बख्शने की घोषणा की गई थी. छत्तीसगढ़ में भवन निर्माण कार्य में संलग्न मजदूरों के लिये इज्जत कार्ड योजना का शुभारंभ मुख्यमंत्री रमन सिंह ने राजनांदगाँव से किया था. बकौल रमन सिंह- “अब मजदूर काम करने के लिये राजनांदगाँव से भाटापारा तथा गोंदिया तक मुफ्त में आ जा सकेंगे.”

लेकिन मुख्यमंत्री इज्जत योजना ढोल की पोल बनी हुई है. इस मुख्यमंत्री इज्जत कार्ड की पात्रता केवल उन्हीं मजदूरो की होगी जिनका मासिक वेतन 1500 रुपये हो. जबकि छत्तीसगढ़ में अकुशल श्रमिकों का न्यूनतम वेतन 4646 रुपये मासिक तय किया जा चुका है. इस प्रकार छत्तीसगढ़ का न्यूनतम वेतन पाने वाला कोई भी मजदूर मुख्यमंत्री इज्जत कार्ड पाने का हकदार नही होगा.

इस योजना को 28 दिसंबर 2012 को शुरु किया गया था जबकि 1 अक्टूबर 2012 को नया न्यनतम वेतन लागू किया जा चुका था. जिसके अनुसार अकुशल श्रमिक को 4646 रुपये, अर्द्ध कुशल श्रमिक को 4828 तथा कुशल श्रमिकों को 5088 रुपये मासिक राज्य सरकार द्वारा ही तय किया गया था. जब सबसे कम न्यूनतम वेतन ही 4646 रुपये हो तब इज्जत कार्ड पाने की पात्रता 1500 रुपये तक मासिक वेतन तय करने का मतलब ही है कि न्यूनतम मजदूरी पाने वाला भी इस योजना का लाभ नहीं ले सकता.

माकपा नेता नंद कश्यप कहते हैं- “छत्तीसगढ़ सरकार यह मानकर बैठी है कि उसके द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन सिर्फ घोषणा भर है जिसका पालन ठेकेदार तथा मालिकों द्वारा नही किया जायेगा. इस प्रकार छत्तीसगढ़ सरकार की मुख्यमंत्री इज्जत कार्ड योजना तथा घोषित न्यूनतम वेतन में विरोधाभास है. यह विरोधाभास ही वह चोर दरवाजा है जिससे ठेकेदार और मालिकान छूट निकलेंगे.”


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