बेटे की चाह में बेटी की हत्या

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के एक गांव में पिता ने बेटे की चाह में बेटी की हत्या कर दी. मिली जानकारी के अनुसार रायगढ़ जिले के कोसीर तहसील के सिंघनपुर गांव में रहने वाले तीन पुत्रियों के पिता ओमप्रकाश वारे ने मंगलवार की सुबह अपनी एक साल की मासूम बेटी को कुयें में फेंक दिया. बाद में खोजने पर बच्ची की लाश कुयें में मिली.

आरोपी ओमप्रकाश वारे की तीन बेटियां हैं. छोटी बेटी एक साल की है. ओमप्रकाश चाहता था कि उसे दो बेटियों के बाद एक बेटा हो परन्तु तीसरी संतान भी बेटी ही हुई. इसको लेकर उसका अपनी पत्नी से अक्सर विवाद होता रहता था.

मंगलवार की सुबह जब आरोपी की पत्नी नहाने के लिये गई हुई थी तो उसने बच्ची को कुयें में फेंक दिया था. मां ने बाथरूम से आकर जब बच्ची के बारें में पूछा तो आरोपी ओमप्रकाश कुछ जवाब न दे पाया.

बाद में खोजने पर बच्ची की लाश कुयें में मिली. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है.

उल्लेखनीय है कि पिछले माह ही रायपुर विधानसभा के चटौद गांव में रहने वाले एक शराबी पति 40 वर्षीय हरिशंकर ढीमर ने अपनी पत्नी 35 वर्षीय हेमिनबाई की चार बेटियों को जन्म देने के कारण हत्या कर दी थी.

वैज्ञानिक तथ्य: पति बेटा-बेटी के जन्म का जिम्मेदार
अक्सर समाज में बेटियों को जन्म के लिये पत्नी को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है तथा उस पर ताने कसे जाते हैं. जबकि वैज्ञानिक तौर पर पति ही बेटा या बेटियों के जन्म के लिये जिम्मेदार होता है. दरअसल लड़कियों में xx क्रोमोसोम के 23 जोड़े तथा लड़कों में xy क्रोमोसोम के 23 जोड़े होते हैं.

जब पति के वीर्य में x क्रोमोसोम की मात्रा अधिक होती है तो वह पत्नी के x क्रोमोसोम के साथ मिलकर लड़की को जन्म देता है. ठीक इसी तरह से जब पति के वीर्य में y क्रोमोसोम की मात्रा अधिक होती है तो वह पत्नी के x क्रोमोसोम के साथ मिलकर बेटे को जन्म देता है. जब पति के वीर्य में xy क्रोमोसोम की मात्रा बराबर होती है तो लड़का या लड़की के जन्म की समान संभावना रहती है.

कुलमिलाकर यह आनुवांशिक जीन है जो तय करता है कि लड़का पैदा होगा या लड़की उसके बावजूद समाज में पत्नी से उम्मीद की जाती है कि वह परिवार को बेटा दे. हालांकि, ऐसे परिवारों की भी कमी नहीं हैं जो बेटे के बजाये बेटी की चाहत रखते हैं.

शोध के नतीजे:
विदेश में इस बारें में एक शोध किया गया जिसमें 927 वंश-वृक्ष का अध्ययन किया है. इस अध्ययन में 5,56,387 लोगों के बारें में विस्तार से जांच की गई. इस अध्ययन में पाया गया कि यह आनुवांशिक रूप से तय होता है कि पैदा होने वाले बच्चे का लिंग क्या होगा. इस अध्ययन में 927 परिवारों के साल 1600 से होने वाले बच्चों का अध्ययन किया गया. अध्ययन में पाया गया कि जिन पतियों के ज्यादा भाई होते हैं वहां लड़के की जन्म की संभावना ज्यादा होती है तथा जिनके अधिक बहनें होती है उनके यहां लड़की की जन्म की अधिक संभावना होती है. अध्ययन को पढ़ने के लिये क्लिक करें.

छत्तीसगढ़ लिंगानुपात में अग्रणी
2011 की जनगणना के मुताबिक देश में स्त्रियों का अनुपात प्रति 1000 पुरुषों की तुलना में 940 है. छत्तीसगढ़ का औसत 991 है. छत्तीसगढ़ की स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है लेकिन यह बढ़त मिली है छोटे शहरों और कस्बों से.

बस्तर में कन्याओं का अनुपात सबसे ज्यादा 1024 है, फिर क्रमश: दंतेवाड़ा 1022, महासमुंद 1018, राजनांदगांव 1017, धमतरी 1012, काकेंर 1007 तथा जशपुर 1004 है.

इसकी तुलना में कोरबा 971, बिलासपुर 972, रायपुर 983, दुर्ग 988 एवं रायगढ़ 993 है. अर्थात सबसे कम स्त्रियों का अनुपात कोरबा तथा बिलासपुर का है.

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