नर्सिंग शिक्षा के लिए शुल्क निर्धारित

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में नर्सिंग पाठ्यक्रम के लिये फीस निर्धारित कर दी गई है. कोई भी शिक्षण संस्था इससे ज्यादा फीस नहीं ले सकेगी तथा न ही किसी अन्य मद में पैसे ले सकेगी. जारी आदेश के अनुसार निर्धारित शुल्क से अधिक शुल्क लेना अथवा निर्धारित मदों से अन्य मदों में शुल्क लेना केपीटेशन शुल्क कहलायेगा एवं दोषी संस्था पर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार वैधानिक कार्यवाही की जाएगी. इस संबंध में जारी दिशा-निर्देश में कहा गया है कि निर्धारित अंतिम शुल्क में शिक्षण शुल्क, विकास शुल्क तीन सौ रूपये प्रतिवर्ष एवं अन्य विविध शुल्क शामिल है इसके अतिरिक्त कोई अन्य शुल्क नहीं देना होगा. निर्धारित शुल्क पूरे अवधि के लिए वही रहेगा, जो प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए निर्धारित है.

छत्तीसगढ़ निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों के लिए गठित प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति द्वारा निजी नर्सिंग महाविद्यालयों में संचालित बीएससी और एमएससी नर्सिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए फीस का निर्धारण कर दिया गया है. समिति द्वारा निर्धारित शुल्क शासन द्वारा मान्य कर लिया गया है. यह आदेश आगामी आदेश तक लागू रहेगा.

समिति द्वारा शैक्षणिक सत्र 2013-14 से 2015-16 तक बीएससी पाठ्यक्रम के लिए गायत्री कॉलेज ऑफ नर्सिंग दंतेवाड़ा, रविशंकर इंस्टीट्युट ऑफ नर्सिंग, नया रायपुर, सूर्या नर्सिंस कॉलेज जगदलपुर और जगदलपुर इंस्टिट्युट ऑफ नर्सिंग, जगदलपुर संस्थाओं के लिए निर्धारित शुल्क (शिक्षण शुल्क, विकास शुल्क एवं अन्य शुल्क सहित) फीस 51 हजार 010 रूपये होगा.

इसी प्रकार शैक्षणिक सत्र 2012-13 से 2014 -15 तक एमएससी पाठ्यक्रम के लिए कॉलेज ऑफ नर्सिंग पी.जी.आई.बी.एम. साईंसेज, मनोपचार अस्पताल, माना बस्ती रायपुर के लिए 83 हजार 750 रूपये और शैक्षणिक वर्ष 2015-16 से 2017-18 तक के लिए फीस 86 हजार 110 रूपये निर्धारित किया गया है.

इस आशय का आदेश मंत्रालय स्थित चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा सर्व संबंधितों को भेज दिया गया है. यह समिति छत्तीसगढ़ निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थान (प्रवेश का विनियमन एवं शुल्क निर्धारण) अधिनियम 2008 के तहत गठित की गई है.

विश्वविद्यालय द्वारा विश्वविद्यालयीन शुल्क एवं शासन द्वारा निर्धारित काउंसिलिंग शुल्क अलग से लिया जा सकता है. पत्र में कहा गया है कि कॉशन मनी पन्द्रह सौ रूपये केवल एक बार प्रवेश के समय ही देना होगा, जो संस्था छोड़ने अथवा पाठ्यक्रम समाप्त होने पर विद्यार्थियों का वापस मिलेगा. यदि पाठ्क्रम एक्रीडिटेड है तो इसके लिए प्रति छात्र प्रति वर्ष पांच सौ रूपये अतिरिक्त फीस ली जा सकती है. निर्धारित अंतिम तिथि तक शुल्क जमा नहीं करने पर संस्था द्वारा छात्र से अधिकतम पच्चीस रूपये प्रतिदिन के हिसाब से विलंब शुल्क लिया जा सकता है.

पत्र में कहा गया है कि कक्षाओं से अनुपस्थिति के लिए फाइन अथवा अर्थदंड लेने के लिए संस्था अधिकृत नहीं है. इस संबंध में विश्वविद्यालय के प्रावधानों के आधार पर ही कार्यवाही की जा सकेगी.

एक वर्ष की फीस का तात्पर्य बारह माह के फीस है. निर्धारित फीस केवल प्रवेशित छात्रों के लिए अध्ययन जारी रखने तक की अवधि के लिए है. सीट निरस्त कराने पर छात्र द्वारा जमा किए फीस को संस्था को जब्त करने अथवा अर्थदंड लेने का अधिकार नहीं है.

पत्र में कहा गया है कि संस्थाओं द्वारा प्रवेश के समय छात्र से स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र, माइग्रेशन, चरित्र प्रमाण पत्र तथा आय प्रमाण पत्र के अलावा दसवी, बारहवी, जाति, निवास कोई भी मूल प्रमाण पत्र जमा कराया जाना है. केवल प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए उसका अवलोकन किया जा सकता है.

पत्र में कहा गया है कि शासन द्वारा निर्धारित अंतिम शुल्क उच्चतम है, यदि कोई संस्था चाहे तो इससे कम शुल्क ले सकती है. इन निर्देशों का उल्लघंन करने वाली संस्था पर अधिनियम क प्रावधानों अनुसार कार्यवाही की जाएगी.

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