जीडीपी में पिछड़ गया छत्तीसगढ़

रायपुर | संवाददाता: सकल घरेलू उत्पादन में छत्तीसगढ़ की हालत खराब है. तमाम दावों के बीच हकीकत ये है कि 2000 में अस्तित्व में आये तीन राज्यो में भी छत्तीसगढ़ दूसरे नंबर पर है. छत्तीसगढ़ की यह स्थिति प्रदेश के सकल घरेलू उत्पादन यानी जीडीपी के आधार पर है. छत्तीसगढ़ का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पादन वर्ष 2012 में 46,743 रुपये है, जबकि साथ में अस्तित्व में आये उत्तराखंड का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पादन 79,940 रुपये है. पूरी दुनिया में विकास को नापने का यह सबसे सटीक तरीका है.

हालत ये है कि यह देश के औसत प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पादन 61,564 रुपये से भी छत्तीसगढ़ का आंकड़ा काफी कम है.


प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पादन प्रदेश के कुल औद्योगिक, कृषि उत्पादन तथा सेवा क्षेत्र को जोड़कर, पश्चात् उसका जनसंख्या के अनुपात में औसत गणना कर निकाला जाता है.

वर्ष 2012 के आंकड़े देखें तो भाजपा शासित प्रदेश गुजरात, कर्नाटक (अब वहा दूसरी सरकार है) तथा पंजाब भी छत्तीसगढ़ से आगे रहे हैं. केवल मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ से पीछे है. इन राज्यों का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पादन क्रमशः 89,668 रुपये, 69,051 रुपये, 78,594 रुपये तथा मध्यप्रदेश का 37,994 रुपये है.

यहा तक कि पूर्वोत्तर का त्रिपुरा 50,175 रुपये, मेघालय 53,542 रुपये, नागालैंड 56,461 रुपये, अरुणाचल प्रदेश 74,059 रुपये, मिजोरम 54,689 रुपये, सिक्किम 1,21,440 रुपये प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पादन के साथ छत्तीसगढ़ से आगे है.

पूरे देश के 22 राज्यों का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पादन छत्तीसगढ़ से ज्यादा है. यहां तक कि अंडमान-निकोबार द्वीप में भी प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पादन 93,075 रुपये तथा पांडिचेरी का 98,055 रुपये प्रति व्यक्ति है.

संतोष की बात केवल इतनी भर है कि छत्तीसगढ़ के सकल घरेलू उत्पादन की विकास दर अच्छी है. लेकिन अर्थशास्त्री मानते हैं कि अगर हम पिछड़े हुये हैं तो केवल विकास दर से कुछ नहीं होगा. छत्तीसगढ़ में विकास दर 18.36 प्रतिशत है लेकिन सकल घरेलू उत्पादन के विकास दर में भी राजस्थान 21.91 प्रतिशत, मध्यप्रदेश 19.02 प्रतिशत, अरुणाचल प्रदेश 27.59 प्रतिशत तथा दिल्ली 18.76 प्रतिशत के साथ छत्तीसगढ़ से आगे है.

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