15 क्विंटल धान खरीदी से सीमित राहत

रायपुर | विशेष संवाददाता: छत्तीसगढ़ सरकार की किसानों से 15 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी को जानकार सीमित राहत मान रहें हैं. गुरुवार को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने घोषणा की कि, “..सहकारी समितियों में समर्थन मूल्य नीति के तहत धान खरीदी की मात्रा प्रति एकड़ दस क्विंटल से बढ़ाकर 15 क्विंटल की जायेगी.” इसी के साथ मुख्यमंत्री ने कहा कि “…..विधायकों और किसानों सहित सबकी भावना के अनुरूप राज्य सरकार ने आज यह निर्णय लिया है और आज ही मैंने मुख्य सचिव तथा खाद्य विभाग के प्रमुख सचिव को यह आदेश दिया है कि सहकारी समितियों के उपार्जन केन्द्रों में इस निर्णय के अनुरूप कल से ही धान खरीदी की सारी व्यवस्था हो जाए. मुख्यमंत्री ने किसानों को बताया कि इस संबंध में आज ही आदेश भी जारी कर दिया गया है.”

डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश के 95 प्रतिशत से 98 प्रतिशत तक किसानों को राज्य सरकार के इस ताजा फैसले का फायदा मिलेगा.


छत्तीसगढ़ सरकार के इस फैसले पर अपनी राय देते हुए छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते ने इसे सीमित राहत देने वाला करार दिया. संजय पराते ने कहा” इस बार के अनुमान के अनुसार छत्तीसगढ़ में 120 क्विंटल धान का उत्पादन हुआ है, यदि किसानों से प्रति एकड़ 15 क्विंटल धान खरीदा जाता है तो केवल 50 लाख टन धान ही न्यूनतम समर्थन मूलेय पर खरीदा जायेगा.”

उन्होंने आगे बताया कि ” इससे अधिक मात्रा का धान किसानों को खुले बाजार में बेचना पड़ेगा फिर इस घोषणा का फायदा किसानों को कितना मिल सकेगा.”

रायपुर में रहने वाले छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते ने कहा कि छत्तीसगढ़ का किसान औसतन प्रति एकड़ 20-25 क्विंटल धान की पैदावार करता है. इसका अर्थ है कि उसे करीब 7 क्विंटल धान प्रति एकड़ के हिसाब से खुले बाजार में बेचना पड़ेगा. वहीं, बाजार में धान की आवक बढ़ जाने से किसानों को समर्थन मूल्य से भी कम में धान बेचना पड़ेगा.

छत्तीसगढ़ के जांजगीर में रहने वाले एक राइस मिल मालिक ने कहा कि सरकार के पास फंड की कमी होने के कारण इस बार किसानों से पूरा धान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदा जा रहा है अन्यथा पहले सरकार किसानों से पूरा धान खरीद लेती थी.

संजय पराते ने इस धान के अर्थव्यवस्था पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि किसानों को सहकारी बैंकों से प्रति एकड़ धान के उत्पादन के लिये करीब 12 हजार रुपये कर्ज लेने पड़ते हैं. जिसमें खाद तथा बीज का मूल्य शामिल है. उन्होंने बताया कि ” छत्तीसगढ़ सरकार के इसी साल पूर्व में जो 10 क्विंटल धान प्रति एकड़ खरीदने का फैसला लिया गया था उससे किसानों को प्रति एकड़ करीब 13 हजार रुपये मिलते जिसमें से कर्ज के 12 हजार रुपये काट लिये जाते.”

सरकार के गुरुवार के फैसले को समझाते हुए उन्होंने बताया कि प्रति एकड़ 15 क्विंटल धान खरीदने से किसानों को प्रति एकड़ करीब 19,500 रुपये मिलने जा रहें हैं जिसमें से कर्ज के 12 हजार काट लिये जायेंगे. जाहिर है कि छत्तीसगढ़ सरकार के नये फैसले से किसानों को प्रति एकड़ करीब 7,500 रुपये मिलने जा रहें हैं जो नाकाफी हैं. वहीं बाकी के धान खुले बाजार में बेचना घाटे का सौदा होगा.

संजय पराते ने बताया कि मंडी में प्रति क्विंटल धान की कीमत 1000-1100 रुपये तक ही मिलती है. जब संजय पराते से पूछा गया कि यदि किसान सारे धान मंडी में बेचे तो क्या होगा, तब उन्होंने बताया कि किसानों को तो कर्ज चुकाना ही पड़ेगा अन्यथा उन्हें डिफाल्टर घोषित कर अगले साल से कर्ज नहीं मिलेगा.

वहीं, बिलासपुर में रहने वाले कृषक नेता नंदकुमार कश्यप ने बताया कि स्वामीनाथन समिति ने धान पर न्यूनतम समर्थन देने की बात की थी जिससे किसानों का बाजारों में शोषण न हो.

नंदकुमार कश्यप ने कहा कि ” यूरोप तथा अमरीका में किसानों को सबसे ज्यादा सब्सिडी दी जाती है. वहां पर किसानों को बाजार में धान व गेंहू बेचने पर सरकार के तरफ से आश्वस्त लाभ के रूप में अच्छी-खासी रकम दी जाती है जबकि हमारे देश में सब्सिडी को कम किया जा रहा है.”

नंदकश्यप ने बताया कि “विश्व व्यापार संगठन के तहत भारत पर सब्सिडी कम करने के लिये विकसित देश दबाव डालते हैं वहीं, अपने देश में किसानों को नगद भुगतान किया करते है.” नंदकुमार कश्यप ने कहा कि यह सब विश्व व्यापार संगठन का दबाव है जिसके तहत विकसित देशों की बड़े भाई की भूमिका को सुनिश्चित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि हमें इस विश्व व्यवस्था से लड़ना पड़ेगा जिसमें किसानों को जोड़ने की आवश्यकता है.

रायपुर में रहने वाले छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते ने बताया कि गुरुवार को ही एक समाचार पत्र में छपा था कि बालोद जिले के गुरुर ब्लाक के मोहरा गांव के एक किसान ने बुधवार को आत्महत्या कर ली है.

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