IAS मेनन को कन्हैया मामले में नोटिस

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ सरकार ने आईएएस मेनन को कन्हैया मामले में नोटिस जारी किया है. वर्तमान में चिप्स के सीईओ अलेक्स पॉल मेनन द्वारा नोटिस का जवाब देने के बाद मुख्यमंत्री इस पर फैसला लेगें. उल्लेखनीय है कि इस साल मार्च माह में अलेक्स पॉल मेनन ने जेएनयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार के समर्थन में कथित रूप कुछ पोस्ट डाला था. उस पर विवाद खड़ा होने पर कन्हैया कुमार ने उसे अपना निजी विचार बताया था.

उस समय अलेक्स पॉल मेनन छत्तीसगढ़ के बलरामपुर के कलेक्टर थे. उन्होंने कन्हैया कुमार के समर्थन में पोस्ट डाले थे तथा उसका लिंक अपने फेसबुक के वॉल पर भी शेयर किया था. पूरे देश में कन्हैया कुमार ऐसे इकलौते आईएएस अफसर थे जिन्होंने जेएनयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार का समर्थन किया था.


गौरतलब है कि छतीसगढ़ कैडर के आईएएस अफसर अलेक्स पॉल मेनन ने फेसबुक के अपने एकाउंट से रोहित वेमुला और कन्हैया कुमार के समर्थन में 12 आर्टिकल शेयर किये थे. उन्होंने ट्वीटर पर भी अपने पोस्ट में इन छात्रों के प्रति अपना समर्थन जताया था.

इस मामले में एलेक्स का कहना था कि मुझे इस बात का दुख है कि मीडिया “सरकारी अधिकारियों द्वारा किए जा रहे अच्छे कामों” का जिक्र नहीं कर रही है बल्कि हमारी सोशल मीडिया एक्टिविटी पर नजर रख रही है. उन्होंने कहा था, “मैंने न तो कन्हैया और न ही रोहित वेमुला के प्रति अपना समर्थन जाहिर किया है. वे सिर्फ कुछ लेख थे जिसे मैंने शेयर किया था. मैं सरकारी अधिकारी हूं और मेरी पूरी वफादारी सरकार के साथ है.”

मेनन ने अपने बचाव में कहा था कि यह उनके निजी विचार हैं इसे आम आदमी के विचार के तौर देखा जाना चाहिये. उन्होंने कहा था कि आदिवासी बहुल इलाकों में मेरे किए कामों की चर्चा होनी चाहिये, न कि मेरे ट्वीट और फेसबुक पर किए पोस्ट पर चर्चा होनी चाहिये.

इसी साल जून में अलेक्स पॉल मेनन का एक और फेसबुक पोस्ट विवादों में आ गया. जिसमें उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में दावा किया था कि 94% फांसी दलित-मुस्लिमों को दी जाती है. सोशल मीडिया पर अपने इस पोस्ट के साथ ही उन्होंने सवाल किया था कि भारत की न्यायिक व्यवस्था पक्षपातपूर्ण है.

अलेक्स पॉल मेनन के उस फेसबुक पोस्ट की भी पड़ताल की जा रही है. सामान्य प्रशासन विभाग की सचिव निधि छिब्बर ने इसकी पुष्टि की थी.

छत्तीसगढ़ के आईएएस अफसर अलेक्स पॉल मेनन उस समय सुर्खियों में आये थे जब वे बस्तर के सुकमा में कलेक्टर के पद पर पदस्थ थे. सुकमा जिले के कलेक्टर रहने के दौरान 21 अप्रैल 2012 को नक्सलियों ने मेनन को किडनैप कर लिया था.

कलेक्टर मेनन 11 दिन नक्सलियों के कब्जे में रहे थे. 3 मई 2012 को एक मीडिएटर कर मदद से मेनन को रिहाई हो सकी थी.

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