छत्तीसगढ़: 884 km रेल लाइन बनेगी

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ में चार नये रेल कॉरिडोर बनाने रेल मंत्रालय के साथ संयुक्त उद्यम बनाया गया है. इस समझौते पर गुरुवार को नई दिल्ली में हस्ताक्षर हुये. इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुक्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि नये रेल मार्गों के निर्माण से छत्तीसगढ़ के पिछड़े और दूरस्थ इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का मार्ग भी प्रशस्त होगा. उन्होंने बताया कि आज छत्तीसगढ़ ने 884 किलोमीटर रेलवे लाईन के विकास के लिए रेलवे मंत्रालय के साथ ज्वाइंट वेंचर बनाकर कार्य करने के लिए एक साझा समझौता किया है.

इसके तहत डोंगरगढ़-खैरागढ़-कवर्धा-मुंगेली-कोटा-कटघोरा-बिलासपुर के 270 किलोमीटर लंबाई वाले रेल कॉरिडोर, रायपुर-बलोदाबाजार -झारसगुड़ा के 310 किलोमीटर लंबाई वाले रेल कॉरिडोर, अंबिकापुर-बरवाडीह के बीच 182 किलोमीटर रेल कॉरिडोर और सूरजपूर-परसा -ईस्ट-वेस्ट कारिडोर के 122 किलोमीटर लंबाई के रेल कॉरिडोर का निर्माण शामिल हैं.


छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा- छत्तीसगढ़ सरकार पूर्व में ही रेल मंत्रालय, कोल मंत्रालय एवं इस्पात मंत्रालय के साथ साझा उद्यम बनाकर 546 किलोमीटर रेलवे लाईन के निर्माण पर कार्य कर रही है. इनमें से ईस्ट कारिडोर फेज-1, खरसियां से धर्मजयगढ़ के बीच का कार्य मार्च 2018 तक पूर्ण हो जायेगा. इसी प्रकार फेज-2 के धर्मजयगढ़-कोरबा के बीच रेलवे लाईन निर्माण का कार्य मार्च 2020 तक तथा ईस्ट-वेस्ट कारिडोर के तहत गेवरा से पेण्ड्रा रोड के बीच का कार्य भी मार्च 2019 तक पूर्ण हो जायेगा. इस संपूर्ण रेल मार्ग के लंबाई 311 किमी है.

उन्होंने बताया -दल्ली राजहरा से रावघाट 95 किमी और रावघाट से जगदलपुर 140 किमी रेलमार्ग का निर्माण भी वर्ष 2020-21 तक पूर्ण हो जाएगा. उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में रेल घनत्व राष्ट्रीय औसत के आधे से भी कम है जबकि हम रेल को फ्रेट राजस्व के रूप में सबसे ज्यादा राजस्व देते है.

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि इस उद्यम से देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा.

प्रभु ने इस मौके पर कहा, “लोगों की मांग को पूरा करने के लिए जरूरी है कि सभी राज्य सरकारें रेल मंत्रालय से हाथ मिलाएं. यह प्रधानमंत्री की सहकारी संघवाद के दर्शन के अनुरूप है.”

प्रभु ने 2016-17 के बजट में घोषणा की थी कि उनका मंत्रालय बुनियादी ढांचों के विकास के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करेगा.

वहीं, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि राज्य में रेलवे नेटवर्क के विस्तार से प्राकृतिक संसाधनों के प्रसंस्करण में मदद मिलेगी.

रमन सिंह ने कहा, “राज्य में बहुत ही कम समय में अतिरिक्त 760 किलोमीटर रेललाइनों का निर्माण कर लिया गया है. इससे हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों का पूरी क्षमता से प्रसंस्करण करने में मदद मिलेगी.”

अभी तक कुल 8 राज्यों ने मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जबकि 17 अन्य राज्यों प्रस्ताव पर सहमति दी है.

एमओयू के मुताबिक एक संयुक्त कंपनी की स्थापना की जाएगी, जिसमें 51 फीसदी शेयर राज्य सरकार का होगा और बाकी रेल मंत्रालय का होगा.

मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया, “यह कंपनी मुख्य रूप से राज्य और केंद्र सरकार के अलावा वित्त पोषण के रास्ते की पहचान करेगा. परियोजना के वित्त की उपलब्धता हो जाने के बाद परियोजना के हिसाब से स्पेशल परपज वेहिकल (एसपीवी) का गठन किया जाएगा. इस एसपीवी में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के अन्य हितधारक भी शामिल हो सकते हैं. हालांकि संयुक्त उद्यम वाली कंपनी की एसपीवी में कम से कम 26 फीसदी हिस्सेदारी अनिवार्य होगी.”

इस एमओयू का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भूमि का स्वामित्व एसपीवी के पास होगा ताकि वह अपनी वाणिज्यिक क्षमताओं का दोहन कर सके.

इसमें कहा गया, “रियायत अवधि के अंत में, रेलवे के पास यह विकल्प होगा कि वह संपत्ति को नाममात्र की कीमत पर खरीद ले.”

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