सेंट्रल यूनिवर्सिटी प्रभारी कुलपति के सहारे!

बिलासपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी में इन दिनों टीचिंग स्टाफ की भारी कमी है. इसके साथ ही यूनिवर्सिटी में पूर्णकालिक कुलपति की नियुक्ति नहीं होने से प्रभारी कुलपति ही यूनिवर्सिटी का प्रभार संभाले हुए हैं. बताया जाता है कि यहां प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व असिस्टेंट प्रोफेसरों के पद खाली पड़े हुए हैं. लगभग 200 टीचर्स की कमी यहां बताई जा रही है.

सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पिछले आठ महीने से पूर्णकालिक कुलपति की नियुक्ति नहीं होने से प्रभारी कुलपति के सहारे ही यूनिवर्सिटी संचालित किया जा रहा है. यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति डॉ. लक्ष्मण चतुर्वेदी फरवरी 2014 में यहां से सेवानिवृत्त हुए थे. उन्होंने सेवानिवृत्ति के पूर्व सम-कुलपति प्रो. एम.एस.के. खोखर को कुलपति का प्रभार दिया था, तब से खोखर ही कुलपति का प्रभार संभाल रहे हैं.

बताया जाता है कि प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदों पर नियमित नियुक्तियां नहीं होने से यहां अध्यापन कार्य भी प्रभावित हो रहा है. शिक्षकों की कमी दूर करने हर साल यहां एडहाक पर शिक्षकों की नियुक्ति की जाती थी, लेकिन इस समय सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पूर्णकालिक कुलपति नहीं होने से केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय से अनुमति लेकर एडहाक पर शिक्षकों की भर्ती की गई.

बताया जाता है कि सम-कुलपति प्रो. खोकर कुलपति के प्रभार पर हैं, लेकिन प्रभारी कुलपति को न तो नियमित और न ही एडहाक भर्ती करने का अधिकार है, इसलिए शिक्षकों की भर्ती एडहाक पर करने के लिए मानव संसाधन मंत्रालय से अनुमति ली गई.

जानकारी के अनुसार नए कुलपित की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी भी गठित की गई थी और आवेदन प्रक्रिया के बाद उम्मीदवारों की सूची का शार्टआउट एवं पावर प्रेजेंटेशन भी हो चुका है. इन सब प्रक्रिया के बाद तीन नामों का पैनल विजिटर राष्ट्रपति को भी भेजा गया था. लेकिन लोकसभा चुनाव और दीगर कारणों से नियुक्ति प्रक्रिया लटकी हुई है.

गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी, बिलासपुर के प्रभारी कुलपति प्रो. खोखर ने कहा, “यूनिवर्सिटी में टीचिंग स्टाफ की कमी तो है. पूर्व में कई बार इंटरव्यू भी हुए थे, किंतु डिपार्टमेंटों में योग्य टीचर नहीं मिले. हमारी तरफ से यूनिवर्सिटी में टीचिंग स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया की पूरी तैयारी है, पर बेहतर यही होगा कि आने वाले पांच वर्षो के लिए यूनिवर्सिटी का जो नया कुलपति आएगा, उनके आने के बाद ही नियमित नियुक्ति हो. बहुत जल्द स्थिति साफ हो जाएगी.”

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