बरसे बदरा, छत्तीसगढ़ पानी-पानी

रायपुर | संवाददाता: मंगलवार सुबह से बरसात की ऐसी झड़ी लगी कि छत्तीसगढ़ पानी-पानी हो गया. पिछले माह जहां लोग पानी के लिये आसमान की ओर ताके रहते थे वे अब घर में बैठकर पानी रुकने की प्रतीक्षा कर रहें हैं. छत्तीसगढ़ के किसान इस बारिश से खुश हैं परन्तु सतर्कता बरत रहें हैं.

छत्तीसगढ़ के न्यायधानी कहलाने वाले बिलासपुर के तोरवा निवासी तथा एक निजी फर्म में कार्य करने वाले अतीश बरुआ ने बताया कि “मंगलवार को सबेरे मुहल्ले में पानी जमा होने के कारण आफिस ही नही जा सका. उन्होंने कहा कि अब दोपहर को जा रहा हूं.” वहीं, उनकी पत्नी काकोली बरुआ ने कहा कि “सबेरे भींगते हुए लड़की को स्कूल छोड़कर आई थी. जहां पर कुछ देर बाद छुट्टी घोषित कर दिया गया.”

राजधानी रायपुर के एक श्रमिक नेता नवीन गुप्ता इस बात को लेकर चिंतित दिखे कि किस प्रकार से इतने बारिश तथा जलभराव के बीच में धरना संपन्न हो पायेगा. ओडिशा से लगे रायगढ़ के देवेष सरंगी ने कहा कि “पानी के कारण सारा काम-धाम धीमा हो गया है, निकलना जरूरी था इसलिये घर से निकले हैं उन्होंने टिप्पणी की आखिरकार पापी पेट का सवाल है.”

दुर्ग शहर के संतोष सोनी का कहना है कि पानी धीरे-धीरे परन्तु लगातार गिर रहा है. इससे कई काम रुके पड़े हैं वहीं उनकी पत्नी बानी सोनी ने बताया कि “आज रैनी-डे है इसलिये घर में खिचड़ी बन रहा है.” उन्होंने फोन पर नागपुर में पढ़ रही अपनी बिटिया से वहां के बारिश का हाल-चाल पूछा.

सीजीखबर ने छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में कृषि का कार्य करने वाले आनंद मिश्रा से इस बारिश का कृषि पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि “अभी जो पानी गिर रहा है उससे खेत का काम कम रुक गया है. उन्होंने बताया कि यदि ज्यादा पानी गिरा तो खेती को नुकसान होने की संभावना बनी रहती है.”

इसी प्रकार से बिलासपुर में रहने वाले कृषि मामलों के जानकार प्रदीप शर्मा का कहना है कि आज के पानी से नुकसान की कोई संभावना नही है. “बोनी का काम हो चुका है तथा धान 20 दिनों तक पानी में रह सकता है.”

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में रहने वाले एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि बार-बार बिजली आ जा रही है वह भी बरसात के समान अस्थिर हो गई है. उनका कहना है कि “बिजली न होने से घरेलू उपयोग के लिये पानी कम न पड़ जाये.”

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