छत्तीसगढ़: भूख से वृद्ध की मौत

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में भूख से एक वृद्ध की मौत हो गई. छत्तीसगढ़ के पिथौरा जनपद के जगदीशपुर ग्राम पंचायत के झारपारा में रहने वाले 70 वर्षीय वृद्ध रघुमणि हियाल की पिछले दिनों मौत हो गई है. रघुमणि की मौत 24-25 सितंबर के दरम्यानी रात को 2 बजे हुई है. वहीं, प्रशासन इसे साधारण बता रहा है.

ग्राणीणों तथा मृतक की पत्नी विमला हियाल के अनुसार वृद्ध ने 4-5 दिनों से खाना नहीं खाया था. उसका अंतिम संस्कार भी गांव वालों ने ही आपस में चंदा जमा करके किया है. वृद्ध को पिछले 8 माह से शासन द्वारा दिये जाने वाला वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिला था.

5 सितंबर को वृद्ध ने सरकार द्वारा मिलने वाला 35 किलो चावल उठाया था. जिसका आधा उसने बेच दिया. चावल बेचने से मिले पैसे से उसने रोजमर्रा के सामान के अलावा दवाई भी खरीदी थी.

बताया जा रहा है कि सरपंच द्वारा पिछले 8 माह से वृद्धावस्ता पेंशन की राशि आरहित की गई है परन्तु उसे बांटा नहीं गया है. वृद्ध के मरने के बाद हुये बवाल के बाद सरपंच तथा सचिव फरार बताये जा रहे हैं.

भूख से हुई मौत की खबर मिलने के बाद एसडीएम तथा सीईओ गांव पहुंचे.

पिथौरा के अनुविभागीय अधिकारी एसके टंडन का कहना है भूख से हुई मौत की पुष्टि नहीं हुई है. 5 सितंबर को वृद्ध ने 35 किलो चावल उठाया था. निश्चित रूप से वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिला था. बुढ़ापे के कारण स्वभाविक मौत हो सकती है. सरपंच तथा सचिव की लापरवाही लग रही है. सीईओ की रिपोर्ट के बाद सरपंच को बर्खास्त तथा सचिव को निलंबित करूंगा.

वहीं, पिथौरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पीएल ध्रुव ने कहा वृद्धावस्था पेंशन जारी कर दिया गया था, लेकिन हितग्राही को राशि क्यों नहीं मिली, बता नहीं सकता.

जाहिर है कि अब रघुमणि लौट के नहीं आने वाला है. भूख दुनिया का सबसे क्रूरतम हत्यारा है जिसने रघुमणि को सदा के लिये खामोश कर दिया है. लेकिन रघुमणि की मौत कई सवाल छोड़ कर गई है. उसकी मौत का जिम्मेदार कौन है? उसकी गरीबी, उसके पास पैसे का न होना या उसे वृद्धावस्था पेंशन का न मिल पाना.

रघुमणि से पहले भी छत्तीसगढ़ में भूख से मौतें हुई हैं. उस समय भी काफी हो हल्ला मचा था. उसके बाद भी भूख से मरने वालों का सिलसिला रुका नहीं है. आज की समाज व्यवस्था में अन्न, सब्जी, कपड़े, दवायें तथा सभी कुछ बाजार से खरीदने पड़ते हैं. जिसके लिये दाम चुकता करना पड़ता है. बाजार इतना निष्ठुर होता है कि अनाज को सड़ने देगा लेकिन मुफ्त में नहीं देता है.

इस बाजार के बाजारूपन पर रोक लगाने के लिये सरकारें खाद्य सुरक्षा, वृद्धावस्था पेंशन जैसी कई योजनायें जरूर बनाती हैं परन्तु उन पर पूरी तरह से अमल नहीं हो पाता है. अमल करें भी तो कौन, किसके पास समय है कि वोट मागने के अलावा अन्य समय किसी गरीब की झोपड़ी में जाकर उसके रसोई का हाल-चाल पूछा जाये.

बहरहाल, अब जांच-वांच हो सकती है. रघुमणि कुछ दिनों तक राजनीतिज्ञों के जुबान पर रहेगा. इसके बाद कोई और एक रघुदास भूख से मारा जायेगा तब उसके नाम को लेकर हो हल्ला मचाया जायेगा.

भूख के कारणों को मिटाने की कोशिश कोई नहीं करेगा क्योंकि सभी यथास्थितिवादी हैं, भले ही मंगल ग्रह पर पानी की खोज में अरबो-खरबों डालर खर्च हो जाये परन्तु मजाल है कि किसी रघुमणि के घर कोई अनाज लेकर जाये.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *