छत्तीसगढ़: खाता विहीन जन-धन योजना

रायपुर | समाचार डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आम आदमी के लिए जन-धन योजना की शुरुआत की थी. मोदी ने योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का दावा किया था लेकिन यह योजना जमीनी स्तर पर नहीं दिख रही है. खाता नहीं खुलने के कारण कई ग्रामीणों को गांवों में मनरेगा का काम नहीं मिल रहा है. वहीं कई लोगों को वृद्धा पेंशन भी नहीं मिल रही है. उरमाल बैंक कर्मी इस योजना की धज्जियां उड़ाने में लगे हैं. मोदी के इस अभियान की पोल गरियाबंद जिले की निष्टीगुड़ा पंचायत खोल रहा है. यहां स्थिति यह है कि पिछले आठ महीने से आवेदन करने वाले लोगों को आज तक खाता नहीं मिल पाया है. मजबूर ग्रामीण जिम्मेदारों के चक्कर लगा-लगाकर विनती करते ही दिख रहे हैं.

गांव के 70 वर्षीय बुजुर्ग जयलाल यादव ने बताया कि मैंने आज से करीब आठ महीने पहले पंचायत में जाकर आवेदन दिया था. तब सचिव ने एक हफ्ते के अंदर खाता देने की बात कही थी, लेकिन इसके बाद आठ महीने हो चुके हैं, मुझे खाता नहीं मिल पाया है. अब स्थिति यह है कि मैं हर रोज पंचायत जाकर चक्कर लगाकर वापस आ जाता हूं.


देवभोग एसडीएम अरुण मरकाम ने कहा, “मैं एक बार वहां गया था. मैंने सभी खाते तुरंत जारी करने को कहा था. आप बता रहे हैं, यदि ऐसा है तो तुरंत खाता जारी करवाता हूं.”

निष्टीगुड़ा के पंचायत सचिव हस्ताराम यादव ने बताया कि एक माह पूर्व अनुविभागीय अधिकारी और पंजीयन इंस्पेक्टर उरमाल स्थित यूनियन बैंक पहुंचे थे. जहां पर एसडीएम ने संबंधित बैंक के पदाधिकारी को फटकार लगाई थी. जिसके बाद से आनन-फानन में 710 लोगों का खाता जारी किया गया था. वहीं कुछ दिनों बाद स्थिति जस की तस हो गई. आज फिर मैं बैंक का चक्कर लगा रहा हूं. इसके बाद भी मुझे सिर्फ हमेशा समय दिया जाता है.

प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी योजना को छत्तीसगढ़ में रमन सरकार ने बड़े जोर शोर से शुरू किया था. चैनलों के साथ अखबारों में भी विज्ञापन देकर लोगों को मोदी की योजना से जुड़ने के लिए कहा गया था. वहीं कुछ दिनों में ही जिम्मेदार अधिकारियों के सुस्त रवैये के चलते स्थिति जस की तस बन गई.

जन धन योजना 15दिन में लागू हुआ

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