कानन के 28 चीतल कहां गये ?

बिलासपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के कानन पेंडारी जू में चीतलों की संख्या आश्चर्यजनक रूप से घटती जा रही है. बिलासपुर के कानन पेंडारी स्माल जू में वर्ष 2011-12 में जहां कानन में चीतलों की संख्या 229 थी, वह 2012-13 में 95 हो गई तथा 2013-14 में चीतलों की संख्या केवल 36 रह गई है.

गौरतलब है कि 2013-14 में कानन में रहस्यमय तरीके से 21 चीतलों की मौत हो गई थी. जिसे एन्थ्रेक्स से मौत का नाम दिया गया था, उसके बावजूद सवाल उठता है कि 2012-13 में चीतलों की संख्या 95 थी जिसमें से 21 तथाकथित रूप से एन्थ्रेक्स से मरे थे तो बाकी के 28 चीतलों की मौत कैसे हुई है?


विधानसभा में एक सवाल के जवाब में बताया गया है कि कानन पेंडारी के वन्य प्रणियों की देखभाल के लिये वर्ष 2013-14 में 59.33 लाख रुपये खर्च किये गये हैं जो पिछले दो वर्ष में क्रमशः 47 लाख तथा 45 लाख रुपये थे. इनमें अधिकारियों का वेतन भत्ता वगैरह शामिल नहीं है.

सबसे हैरत की बात है कि कानन में वर्ष 2013-14 में वन्य प्राणियों के दवा पर 7.519 लाख रुपये खर्च किये गये हैं जो कि पिछले दो वर्श की तुलना में काफी ज्यादा है. वर्ष 2012-13 में दवाओं पर 1.301 लाख रुपये तथा 2011-12 में महज 0.281 लाख रुपये खर्च किये गये थे.

इसमें गौर करने वाली बात यह है कि 2011-12 में कानन में कम खर्च के बावजूद केवल 8 वन्य प्रणी मरे थे जबकि 2012-13 में 23 वन्य प्रणी मरे थे. कानन में वर्ष 2013-14 में वन्य प्राणियों पर सबसे ज्यादा खर्च करने के बावजूद 45 वन्य प्रणियों की मृत्यु हुई है. यदि इनमें से वर्ष 2013-14 में 21 चीतलों की संख्या को घटा दिया जाये तो भी कुल 24 वन्य प्रणियों की मृत्यु रिकार्ड की गई है.

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