अटल विहार का सपना साकार होगा?

कोरबा | अब्दुल असलम: कोरबा में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की झगरहा में प्रस्तावित अटल विहार कालोनी की फाइल स्वीकृति के लिए अब मंत्रालय के चक्कर काट रही है. परियोजना के लिए प्रस्तावित 22 एकड़ जमीन राजस्व अभिलेख के अनुसार नजूल घोषित है, जो घास मद में दर्ज है. वहीं नगर तथा ग्राम निवेश विभाग ने उसी जमीन का उपयोग आरक्षित वन भूमि में दर्ज बताया है. कलेक्टर ने आवास एवं पर्यावरण विभाग रायपुर को पत्र लिखकर आरक्षित वन भूमि का आवासीय प्रयोजन के लिए उपयोग परिवर्तन करने की गुजारिश की है. बावजूद अब तक विभाग की ओर से प्रस्ताव पर मंजूरी नहीं दी गई है.

कीमती मकानों की दुनिया को दरकिनार कर गृह निर्माण मंडल ने 60 एकड़ जमीन में एचआईजी, एमआईजी, जूनियर एमआईजी व एलआईजी सहित करीब 1200 मकानों के सर्वसुविधायुक्त सैटेलाइट सिटी प्रोजेक्ट का प्रस्ताव तैयार किया था. वन भूमि का रोड़ा आने की वजह से प्रस्तावित सैटेलाइट सिटी प्रोजेक्ट को निरस्त कर दिया गया.

दादरखुर्द में प्रस्तावित 60 एकड़ जमीन पर फारेस्ट रिकार्ड में दर्ज छोटे-बड़े झाड़ के जंगल होने की वजह से वन विभाग से अनापत्ति नहीं मिल सकी थी. इसके स्थान पर झगरहा में अटल विहार कालोनी का प्रोजेक्ट लॉच करते हुए एक प्रस्ताव तैयार किया था. योजना के तहत आईटी कॉलेज के करीब 22.03 एकड़ घास भूमि को चिन्हांकित किया गया है. दादरखुर्द के बाद अब झगरहा की जमीन पर भी अटल विहार परियोजना की फाइल आरक्षित वन भूमि की अड़चन में अटकती दिखाई दे रही है.

इस मामले में विभाग ने आरक्षित वन को भू-उपयोग के लिए परिवर्तन कराने जिला प्रशासन की मदद मांगी, जिसके बाद समस्या का हल निकालने की जुगत में कलेक्टर रीना बाबासाहेब कंगाले ने एक पत्र आवास एवं पर्यावरण मंत्रालय रायपुर के प्रमुख सचिव लिखा. इस बात को अब दो माह गुजरने को है, बावजूद इसके कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है.

कलेक्टर के मुताबिक आने वाले 25-30 दिनों के भीतर आ रही दिक्कते दूर हो जायेंगी. कागजी औपचारिकताओं के फेर में अटल विहार परियोजना की फाइल इस बार मंत्रालय के दफ्तरों के खाक छान रही है. जबकि दूसरी ओर हाउसिंग बोर्ड की सभी नई परियोजनाओं में पूर्व के मुकाबले सुविधाएं बढ़ाई गई हैं. पुराने आवासीय कॉलोनियों में वाहन पार्किंग, गार्डन, परिसर, बाहरी अहाता सहित अन्य सुविधाएं नहीं दी गई थी.

हितग्राहियों को आकर्षित करने इन सुविधाओं को नई कॉलोनियों खरमोरा, गोकुलनगर और उरगा में जोड़ा गया है. बावजूद इसके निर्माणाधीन खरमोरा कॉलोनी में एलआईजी के 90 मकानों के लिए पंजीयन नहीं हुए हैं.

उधर उरगा अटल विहार परियोजना में निजी कॉलोनीयों की तर्ज पर सुविधाएं बढ़ाए जाने के बाद भी एलआईजी, सीनियर एमआईजी और एचआईजी के लगभग 200 मकानों के लिए खरीदार रुचि नहीं दिखा रहे है. उरगा में पानी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होना इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है.

कोयला खदान के नजदीक होने के कारण भूमिगत जल का स्तर काफी नीचे है. दूसरी ओर स्वतंत्र मकान होने के बाद भी शहर से दूर होने के कारण भी लोग उरगा कॉलोनी में कम रूची ले रहे हैं. ऐसे में हाउसिंग बोर्ड के प्रति लोगो की कम होती रूची के बीच अब देखना होगा कि झगरहा अटल विहार कॉलोनी की भूमि को कब तक हरी झंडी मिल पाती है.

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