छत्तीसगढ़: भूविस्थापित तीन दशक से इंतजार में

कोरबा | अब्दुल असलम: छत्तीसगढ़ के कोरबा के मिनी माता बांगो बांध के भूविस्थापितों ने तीन दशकों के इंतजार के बाद 20 फरवरी से अपना मोर्चा खोल लिया है. उल्लेखनीय है कि मिनी माता बांध से प्रभावित 58 गांव के किसानों ने उसलिये अपनी उपजाऊ जमीन हबांध के लिये दे दी थी कि उन्हें रोजगार के साथ मूलभूत सुविधा उपलब्ध करवाई जायेगी.

तीन दशक बीत जाते के बाद ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया है तथा उन्होंने माचाडोली स्थित जल संसाधन विभाग के सामने धरना देना शुरु कर दिया है. प्रभावित ग्रामीणों का दावा है कि उनका धरना अनिश्चित कालीन तक चलेगा जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता है.


गौरतलब है कि 1985 में किसानों की जमीन अधिग्रहित करते समय मुआवजा, नौकरी, बसाहट सहित पट्टे की जमीन देना का वादा किया गया था.

मिनीमाता बांगों बांध के निर्माण के लिये 58 गांव की 12हजार 500 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई थी. तीन दशक से ज्यादा समय से अपने हक की लडाई लड रहे भूविस्थापितों ने आर-पार की लडाई का मुड बना लिया हैं.

ग्रामीणों की मांग है कि जिला कलेक्टर उनसे ज्ञापन लेने शनिवार को माचाडोली आये. इधर इस मामले में जिम्मेदार अधिकारी बात शासन स्तर का बताकर अपने जिम्मेदारी से पल्ला झाड रहे हैं.

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