भूख से मौत पर कांग्रेस की जांच समिति

अंबिकापुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने भूख से बच्चे की मरने की जांच के लिये समिति बनाई है. छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिलांतर्गत सीतापुर में एक आदिवासी बच्चे की भूख से हुई मौत के मामले की जांच के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने एक कमेटी का गठन किया है. इस कमेटी में डॉ. प्रेम साय सिंह, बालकृष्ण पाठक, अमरजीत भगत, अजय अग्रवाल और सफी अहमद को शामिल किया गया है. यह कमिटी जांच के बाद अपनी रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी को सौंपेगी. मामला अब काफी तूल पकड़ता जा रहा है.

मुख्यमंत्री ने सरगुजा कलेक्टर को पीड़ित परिवार की हर संभव मदद करने और मामले की दण्डाधिकारी जांच के निर्देश दिए हैं. सरगुजा कलेक्टर श्रीमती ऋतु सेन ने शनिवार रात अम्बिकापुर से टेलीफोन पर बताया कि उन्होंने इस घटना की दण्डाधिकारी जांच का आदेश दिया है. इसके लिए सीतापुर के अनुविभागीय दण्डाधिकारी, एसडीएम .एस. भगत को जांच अधिकारी बनाया गया है, जो इस बच्चे की मृत्यु की परिस्थितियों की जांच करेंगे. शनिवार को एकग सरकारी विज्ञपत्ति ने इसकी सूचना दी है.

छत्तीसगढ़ के सरगुजा ज़िले में चार साल के एक आदिवासी बच्चे की भूख से हुई मौत के बाद कई सवाल खड़े हो गये हैं. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने दावा किया है कि मारे गये बच्चे के परिवार ने पिछले 4-5 दिनों से खाना नहीं खाया था.

वहीं ज़िले की कलेक्टर ऋतु सेन ने कहा है कि बच्चे की मौत परिस्थितिवश हुई है. हालांकि पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने माना है कि मृत बच्चे के पेट में अन्न का दाना नहीं था.

आरंभिक तौर पर जो जानकारी आई है, उसके अनुसार मृतक बच्चे के पिता की ज़मीन कुछ साल पहले ही बालको-वेदांता ने खनन के लिये ले ली थी. तकनीकि कारणों से इसका मुआवजा भी परिवार को नहीं मिला था. इसके अलावा परिवार को मिलने वाले बीपीएल राशन कार्ड को भी रद्द कर दिया गया था. इलाके में पिछले कई महीनों से रोजगार गारंटी योजना का काम भी बंद पड़ा हुआ था.

गौरतलब है कि मैनपाट के नर्मदापुर खालपारा के रहने वाले आदिवासी सांगत राम मांझी अपने तीन बच्चों के साथ अपने एक रिश्तेदार के यहां सीतापुर जाने के लिये निकला था. रास्ते में सांगत राम बडे पुत्र राजाराम के साथ आगे निकल गया, जबकि शिव और श्रवण पीछे छूट गए और राश्ता भटक गये.

इसके बाद कतकालो गांव के पास दोनों भटके हुये बच्चे एक पेड़ के नीचे पहुंचे, जहां चार साल के छोटे बच्चे शिवकुमार की मौत हो गई. रात भर 6 साल का श्रवण अपने चार साल के भाई शिवकुमार के शव के साथ पेड़ के नीचे पड़ा रहा. भूख के कारण श्रवण की हालत भी बेहाल थी.

शुक्रवार की सुबह गांव की एक महिला ने सबसे पहले शव को देखा, जिसके बाद उसने एमपीडब्लूक कार्यकर्ता को इसकी जानकारी दी. इसके बाद मामला सीतापुर थाने तक पहुंचा. पुलिस का कहना है कि मृतक के पिता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और मृतक की मां की तीन महीने पहले ही मौत हो गई है. तीनों बच्चे पिता के साथ ही रहते थे.

सुपोषण के लिये कुछ दिनों पहले ही केंद्र सरकार द्वारा सम्मानित सरगुजा में चार साल के शिव कुमार की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिये हैं.

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने कहा कि सरकार ने पीड़ित परिवार का राशन कार्ड इसलिये रद्द कर दिया था क्योंकि राशन कार्ड परिवार की महिला के नाम से था, जिसकी कुछ महीने पहले ही मौत हो गई थी. परिवार के पास जीवन यापन का कोई साधन नहीं था. पूरे छत्तीसगढ़ में रोजगार गारंटी का काम भी कई महीनों से बंद पड़ा है.

टीएस सिंहदेव ने कहा कि सरकार पिछले पखवाड़े भर से गांव-गांव में लोक सुराज अभियान चला रही थी, ऐसे में सरकार अगर भूखे परिवार को चिन्हिंत नहीं कर सकी तो इससे बड़ा मजाक कुछ नहीं हो सकता. सिंहदेव ने कहा कि पीड़ित परिवार ने 3-4 दिन से खाना नहीं खाया था और बच्चे की भूख से मौत हुई है. सिंहदेव ने कहा कि केंद्र में नरेंद्र मोदी और राज्य में रमन सिंह के सुशासन का यह असली चेहरा है.

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