छत्तीसगढ़: मेगा पावर प्रोजेक्ट रद्द

रायपुर | समाचार डेस्क: सरगुजा मेगा पावर प्रोजेक्ट को पर्यावरण मंजूरी न मिलने के कारण ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है. इस प्रोजेक्ट से केन्द्र सरकार ने पहले ही हाथ पीछे खींच लिये थे उसके बाद अब छत्तीसगढ़ सरकार ने भी अपने हाथ खड़े कर दिये हैं. इस बात की जानकारी रायपुर स्थित उच्च पदस्थ सूत्रों ने दी है.

सरगुजा के प्रेमनगर में चार हजार मेगावाट का सरगुजा पावर प्रोजेक्ट लगने वाला था. इसके लिये जमीन भी तय कर लिया गया था. इसके लिये हसदेव-अरंड क्षेत्र में कोल ब्लॉक आवंटित हो गया था परन्तु पर्यावरण मंजूरी न मिलने के कारण इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है.

उल्लेखनीय है कि पीएमओ ने भी इसके लिये प्रयास किया था तथा दूसरा कोल ब्लॉक आवंटित करने पर विचार भी किया जा रहा था.

सरगुजा मेगा पावर प्रोजेक्सट से छत्तीसगढ़ को दो हजार मेगावाट की बिजली मिलती.

सरगुजा मेगा पावर प्रोजेक्ट के लिए लगभग 2500 एकड़ जमीन अधिग्रहित किया जाना प्रस्तावित था. जिसमें से पावर प्लांट के लिए 1200 एकड़, राखड़बाध के लिए एक हजार, जल संग्रहण के लिए दो सौ एवं आवासीय परिसर के लिए सौ एकड़ जमीन शामिल था.

उत्पादन के लिए एक हजार 120 मिलियन टन कोयले और 135 मिलियन घनमीटर पानी की आवश्यकता होती. इस परियोजना से 11 गांवों की कुल लगभग 9439 एकड़ जमीन में से तकरीबन 2614 एकड़ जमीन अधिग्रहित किया जाना प्रस्तावित था.

इससे पहले भी कई बार पर्यावरण की मंजूरी न मिलने के कारण यह अल्ट्रा मेगापावर प्लांट शुरु नही हो पाया था.

बताया गया कि इस परियोजना के लिए हसदेव-अरंड क्षेत्र में कोल ब्लॉक आबंटित किया गया. लेकिन 4 हजार मेगावाट की क्षमता वाले इस परियोजना के लिए कोल ब्लॉक को वन-पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी नहीं मिल पा रही है.

प्रस्तावित बिजली परियोजना के लिए कई बार टेंडर भी हुए. लेकिन तिथि आगे बढ़ा दी गई. परियोजना के लिये जरूरी कोयला जहां से खोदा जाना है वह इलाका सरगुजा के घने जंगलों में है जोकि वर्जित क्षेत्र में आता है.


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