छत्तीसगढ़ में सहकारी बैंकों का विलय

रायपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ सरकार में लंबे समय से घाटे में चल रहे 13 सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों का अंतत: विलय हो गया. प्रभावित बैंकों का पंजीयन रद्द करते हुए उनका संविलयन नवगठित आठ सहकारी बैंकों में कर दिया गया है.

सहकारी संस्थाओं के पंजीयक अविनाश चंपावत ने विलय 7 अक्टूबर को विलय संबंधी आदेश जारी किया था और कहा था कि प्रक्रिया पूरी होने तक अपर पंजीयक विकास बैकों के मामले में समन्वयक के रूप में कार्य देखेंगे.


विलय प्रक्रिया के तहत प्रभावित बैंकों का पंजीयन रद्द करने के साथ ही समस्त चल, अचल संपत्तियों, देयताओं, अभिलेखों, इमारत, वाहन व अन्य बैंक खाता परिणाम बैंकों में हस्तांतरित किए गए.

आदेश में साफ किया गया है कि पूर्व बैंक में काम कर रहे कर्मचारियों के वेतन-भत्तों पर संविलयन का कोई असर नहीं पड़ेगा. इस संबंध में जानकारी मिली है कि इन बैंकों के संविलयन की यह प्रक्रिया पिछले तीन सालों से चल रही थी. इस योजना के तहत दीर्घकालीन साख संरचना वाले सहकारी बैंकों का संविलयन अल्पकालीन साख संरचना वाले बैंकों में किया जाना था.

आदेश के तहत फिलहाल इन बैंकों का विलय हुआ है : 1. छग राज्य सहकारी बैंक मर्या. रायपुर, 2. नवीन पंजीकृत जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्या. जशपुर, 3. जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्या. रायपुर, 4. जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्या. दुर्ग, 5. जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्या. राजनांदगांव, 6. जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्या. जगदलपुर, 7. जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्या. बिलासपुर, 8. जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्या. अंबिकापुर.

सहकारिता विभाग के विशेष सचिव डी.डी. सिंह ने कहा कि कुछ सहकारी बैंकों की आर्थिक हालत बेहद खस्ता थी. उनको घाटे से उबारने के लिए संविलयन की प्रक्रिया चल रही थी. पुराने बैंकों का पंजीयन रद्द कर उन्हें नए बैंकों में विलीन कर दिया गया है.

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