छत्तीसगढ़ में मनरेगा बेहाल!

रायपुर | विशेष संवाददाता: छत्तीसगढ़ में मनरेगा के तहत 100 दिनों का रोजगार मागने वालों में से महज 5 फीसदी को ही यह नसीब होता है. छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है, “महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, मनरेगा के तहत चालू वित्तीय वर्ष 2014-15 में अब तक छत्तीसगढ़ के 17 लाख ग्रामीणों को उनकी मांग के आधार पर रोजगार दिया जा चुका है. योजना के तहत सत्यासी हजार से भी अधिक मजदूर परिवारों को 100 दिन से लेकर 150 दिन तक का रोजगार प्राप्त हुआ. इसमें से 46 हजार 865 परिवारों को 100 दिवस और 40 हजार 845 परिवारों को 101 से 150 दिवस का रोजगार मिला. प्रदेश के 15 हजार 011 निःशक्त व्यक्तियों को भी रोजगार मुहैया कराया गया है.”

केन्द्र सरकार के आकड़े भी यही बयां करते हैं. केन्द्र सरकार के आकड़ों के अनुसार साल 2014-15 में 20 लाख 38 हजार 010 परिवारों ने मनरेगा के तहत रोजगार की मांग की थी जिनमें से 17 लाख 42 हजार 042 परिवारों को रोजगार उपलब्ध करवाया जा सका है.

जहां तक बात 100 दिनों के रोजगार उपलब्ध करवाने की बात है छत्तीसगढ़ में 47 हजार 019 परिवारों को ही 100 दिनों का रोजगार दिया जा सका है.

यदि इसकी तुलना पिछले साल के आकड़ों से करें तो नतीजा हैरान करने वाला नजर आता है.

केन्द्र सरकार के आकड़ों के अनुसार साल 2013-14 में
27 लाख 48 हजार 728 परिवारों ने मनरेगा के तहत रोजगार की मांग की थी जिनमें से 25 लाख 12 हजार 379 परिवारों को रोजगार दिया जा सका था. साल 2013-14 में 100 दिनों का रोजगार 3 लाख 46 हजार 292 परिवारों को दिया गया था.

इसके तुलना में साल 2014-15 में अब तक केवल 47 हजार 019 परिवारों को ही 100 दिनों का रोजगार दिया जा सका है.

उल्लेखनीय है कि वित्तीय साल 2014-15 को समाप्त में होने में 2 माह से भी कम समय बचा है ऐसे में 3 लाख परिवारों को 100 दिनों का रोजगार कैसे मुहैय्या करवा जा सकेगा. जाहिर है, छत्तीसगढ़ में मनरेगा के तहत 100 दिनों के रोजगार पाने वाले परिवारों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की जाने वाली है.

जानकारों की माने तो ग्रामीण अंचलों में रोजगार के घटने से वहां की क्रय शक्ति घटती है जिसका परिणाम आगे जाकर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. रोजगार के अवसर घटने से बेरोजगार दिगर राज्यों की ओर पलायन कर जाते हैं.

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