सूखाग्रस्त इलाकों में मनरेगा भी सूखा

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सूखाग्रस्त इलाकों में मनरेगा के तहत 150 दिनों का रोजगार किसी को भी नहीं मिला है. छत्तीसगढ़ के 27 जिलों में महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून के द्वारा जो रोजगार अब तक साल 1014-15 में उपलब्ध कराया गया है उसके अनुसार 101-150 दिनों का रोजगार किसी को भी नहीं मिला है.

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ कैबिनेट की 15 सितंबर की बैठक में पाया गया कि राज्य के 20 जिलों के 93 तहसीलों में अल्प वर्षा के कारण सूखे की स्थिति है. इऩ क्षेत्रों में अनावरी 50 फीसदी रहा है. जाहिर है कि ऐसे में यहां के ग्रामीण कृषि का कार्य नहीं कर सकते है.


यूपीए सरकार ने गांवों वालों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध करवाने के लिये महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून के तहत कार्यक्रम शुरु किया था. इसके तहत गांव वालों को उनके गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराया जाये साल में कम से कम 100 दिनों का.

केन्द्र सरकार के आकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में साल 2014-15 में 27 अक्टूबर तक (1-10) के बीच कुल 3,15,484 परिवारों को, (11-20) के बीच कुल 4,27,006, (21-30) के बीच कुल 3,15,138, (31-40) के बीच कुल 2,04,834, (41-50) के बीच कुल 1,55,639, (51-60) के बीच कुल 1,08,838, (61-70) के बीच 62,786, (71-80) के बीच 52,148, (81-99) के बीच 58,178, 100 दिनों की 2,716 परिवार को रोजगार दिया जा सका है.

आकड़े डंके के चोट पर ऐलान कर रहें हैं कि छत्तीसगढ़ में केवल 2716 परिवारों को ही 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध करवाया जा सका है.

इसी तरह से (101-150) का रोजगार 41,725 परिवारों को मिला है जबकि सूखाग्रस्त इलाकों में किसी को भी (101-150) दिनों का रोजगार नहीं मिला है. उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार चाहती है कि सूखाग्रस्त इलाकों में लोगों को 150 दिनों का रोजगार मिले परन्तु केन्द्र सरकार के आकड़े के अनुसार यह मनरेगा के तहत तो संभव नहीं हो पाया है.

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में 39,32,388 परिवारों को मनरेगा के तहत जॉब कार्ड जारी किया गया है.

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