रोजगार से ज्यादा स्वच्छता पर ध्यान

रायपुर | संवाददाता: मोदी सरकार रोजगार से ज्यादा ध्यान स्वच्छता पर दे रही है.
कम से कम छत्तीसगढ़ को केन्द्र द्वारा आवंटित राशि यही इंगित करती है. ग्रामीण भारत में अपने गांव में रोजगार प्रदान करने के लिये महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना की शुरुआत यूपीए की सरकार ने किया था. मोदी सरकार ने पिछले ढाई साल से ज्यादा समय में कई योजनायें लागू की हैं. जिसमें से एक स्वच्छ भारत मिशन है. इसे 2 अक्टूबर 2014 से शुरु किया गया है.

छत्तीसगढ़ को केन्द्र द्वारा जो राशि पिछले दो सालों में भेजी गई है उससे तो यही इंगित होता है कि सरकार का ध्यान गांव वालों को रोजगार देने से ज्यादा शौचालय बनवाने में है. सरकारी आंकड़ें बता रहें हैं कि छत्तीसगढ़ को मनरेगा के तहत साल 2014-15 में जितनी राशि मिली थी उससे साल 2015-16 में 22 फीसदी कम मिली थी. इसके बाद इस राशि को बढ़ाया गया है. इसी तरह से 2015-16 की तुलना में 2016-17 में अब तक जो राशि प्राप्त हुई है वह 83 फीसदी ज्यादा है.


जहां तक स्वच्छ भारत मिशन की बात है उसके तहत साल 2015-16 में जितनी राशि मिली उससे 194 फीसदी ज्यादा साल 2016-17 में अब तक मिली है.

इससे साफ जाहिर हो रहा है कि मोदी सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत राज्यों को दिये जाने वाले आवंटन में करीब-करीब दोगुना बढ़ोतरी कर रही है. जबकि पहले साल मनरेगा के आवंटन को घटाया गया था उसके बाद इसे 83 फीसदी बढ़ाया गया है. लेकिन इसे यदि साल 2014-15 में आवंटित किये गये राशि की तुलना में देखेंगे तो पायेंगे कि यह बढ़ोतरी महज 42.35 फीसदी ही की गई है.

गौरतलब है कि सरकार पर अक्सर विपक्ष आरोप लगाता रहता है कि उसका ध्यान शौचालय बनाने में ज्यादा है रोजगार उपलब्ध करवाने में कम है, इन आंकड़ों को देखने के बाद उसमें सच्चाई नज़र आ रही है.

नागरिकों को स्वस्थ रखने के लिये स्वच्छता अनिवार्य है. मोदी सरकार द्वारा शुरु किये गये इस योजना को हरगिज भी गलत नहीं कहा जा सकता परन्तु सरकार का ध्यान बेरोजगारों की ओर कम है क्या यह ठीक है?

मोदी सरकार द्वारा भारत स्वच्छ मिशन की शुरुआत करते ही मंत्रियों, सासदों तथा राज्य स्तरीय नेताओं में इस अभियान से जुड़कर फोटो खीचवाने तथा उसे प्रचारित करने की होड़ सी लग गई. काश देश के नेता तथा नीति निर्धारक देश के बेरोजगारों की ओर इतना ध्यान देते तो हमारा देश कहां से कहां पहुंच गया होता.

बता दें कि जिस तरह से गुलामी को सबसे बड़ा अभिशाप माना जाता था उसी तरह से बेरोजगारी भी एक अभिशाप है. जब तक लोगों को रोजगार मुहैय्या नहीं कराया जाता उनकी क्रय शक्ति नहीं बढ़ेगी. जनता की क्रय शक्ति नहीं बढ़ेगा तो बाजार को खरीददार कहां से मिलेंगे.

इसके अलावा, रोजगार का सीधा-सीधा संबंध रोटी, शिक्षा और स्वास्थ्य से है. जब तक देश की अर्थव्यवस्था नहीं सुधरेगी देश आगे नहीं बढ़ सकता है.

छत्तीसगढ़ को मनरेगा के तहत प्राप्त राशि:

* 2013-14 में 1,58,600 लाख रुपये प्राप्त हुआ तथा 2,21,189 लाख रुपये खर्च हुआ. औसत कार्य दिवस 52 हुआ.
* 2014-15 में 1,69,987.54 लाख रुपया प्राप्त हुआ तथा 1,97,612.09 लाख रुपये खर्च हुआ. औसत कार्य दिवस 32 हुआ.
* 2015-16 में 1,31,754.01 लाख रुपया प्राप्त हुआ तथा 1,43,467.45 लाख रुपया खर्च हुआ. औसत कार्य दिवस 47 हुआ. आवंटन 22% घटा.
* 2016-17 में 2,41,978.96 लाख रुपया प्राप्त हुआ तथा 2,44,965.86 लाख रुपया खर्च हुआ. 17 फऱवरी 2017 औसत कार्य दिवस 37 हुआ. 83% बढ़ा.

स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्राप्त राशि

* 2015-16 ग्रामीण- 14,472.02 लाख रुपया, शहरी- 2,708 लाख रुपया. कुल- 17,180.02 लाख रुपये.
* 2016-17 ग्रामीण- 43,834.85 लाख रुपया, शहरी- 6,687.41 लाख रुपया. कुल 50,522.26 लाख रुपये. आवंटन 194% बढ़ा.

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