छत्तीसगढ़ में चहुंमुखी विकास: रमन सिंह

रायपुर । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण की शुरुआत छत्तीसगढ़ी में करते हुए सभी प्रदेशवासियों को बधाई दी. उन्होनें कहा कि आजादी के बाद 66 वर्षों के सफर में हमारे महान देश ने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं लेकिन देशवासियों के मन में यह टीस भी उठती है कि महात्मा गांधी, डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, सरदार वल्लभभाई पटेल, पं. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीनदयाल उपाध्याय, गुरू बाबा घासीदास, शहीद वीरनारायण सिंह, शहीद गुण्डाधूर जैसे अनेक मनीषियों के सपने पूरे नहीं हुए हैं. आज हमारे सामने गौरवमयी विकास यात्रा की दमकती तस्वीरें हैं तो देश में अनेक ज्वलंत समस्याएं भी हैं.

उन्होनें जोर देकर कहा कि लोकतंत्र की सार्थकता निरंतर प्रयासों में निहित होती है. मेरा मानना है कि लोकतंत्र में सत्ता तक पहुंचना, सरकार चला लेना ही काफी नहीं होता बल्कि जनता के दुख-दर्द को महसूस करना जरूरी होता है. उनकी जरूरतों का अनुमान लगाते हुए नीतियां और योजनाएं बनाने का महत्व है. 5 वर्ष में एक बार नहीं बल्कि दिन-रात, सोते-जागते, निरंतर जनता की इच्छाओं को समझते रहना तथा समय रहते निर्णय लेने की इच्छाशक्ति जरूरी होती है. विसंगतियों को जानने-सुनने और सुधार का साहस आवश्यक होता है. मुझे संतोष है कि हम इन कसौटियों पर भी खरे उतरे.

मुख्यमंत्री रमन सिंह ने अटल बिहारी बाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होनें राज्य की सौगात देकर छत्तीसगढ़ के सपने पूरे करने की शुरूआत की थी. हमने छोटी प्रशासनिक इकाइयों और विकेन्द्रीकरण को मूलमंत्र बनाया. जिलों की संख्या 16 से बढ़ाकर 27 कर दी. अब हम रायपुर संभाग का पुनर्गठन करते हुए दुर्ग संभाग बनाने जा रहे हैं, जिसके अंतर्गत राजनांदगांव, बालोद, दुर्ग, बेमेतरा तथा कबीरधाम जिले होंगे. इससे रायपुर तथा दुर्ग दोनों संभागों में प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी. हम तहसीलों के पुनर्गठन की प्रक्रिया भी शीघ्र शुरू कर रहे हैं. ग्राम सुराज, नगर सुराज, जनदर्शन, किसान महोत्सव, विकास यात्रा जैसे आयोजनों से न सिर्फ जनसमस्याओं का निदान किया गया बल्कि जनआकांक्षाओं की पूर्ति भी की गई. ऐसे विभिन्न प्रयासों से सरकार जनता के द्वार-द्वार पहुंची है. हमें प्रशासनिक संवेदनशीलता बढ़ाने और आम जनता का विश्वास पाने में मदद मिली है.

राज्य के दुर्गम अंचलों के बारे में कहते हुए बताया कि सरकार की आसान पहुंच और पारदर्शिता के लिए ई-प्रशासन सेवाओं का व्यापक उपयोग किया जा रहा है. ‘छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम’ के तहत तय समय-सीमा में सेवाएं देने हेतु शासकीय सेवकों की जवाबदेही तय की गई है. शासकीय विभागों, अर्द्धशासकीय संस्थाओं, निगमों, मण्डलों, निकायों में नीलामी तथा विक्रय संबंधी अनुबंधों के लिए हमने ‘सत्य निष्ठा संधि’ की व्यवस्था की है, जिससे सरकारी कामकाज में पारदर्शिता व शुचिता बढे़गी.

स्कूली शिक्षा के प्रति बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें, निःशुल्क गणवेश, शालाओं का विद्युतीकरण, स्वच्छ पेयजल, मध्यान्ह भोजन, एडुसेट केन्द्र, आकर्षक छात्रवृत्ति जैसी योजनाएं कारगर साबित हुई हैं. सरस्वती सायकल योजना से हाईस्कूल में छात्राओं की दर्ज संख्या 63 प्रतिशत से बढ़कर 95 प्रतिशत तक पहुंच गई है. शासकीय ग्रामीण शालाओं के लिए ‘मुख्यमंत्री निर्मल शाला पुरस्कार’ शुरू किया गया है.

रमन सिंह ने कहा कि सही सोच और सतत प्रयासों से राज्य में उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या 250 से बढ़कर 690 हो गई है. राज्य का ग्रॉस इनरोलमेंट रेशो (जीईआर) ढाई प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत हो गया है. एम्स, आईआईएम, एनआईटी आदि खुलने से युवाओं का उत्साह बढ़ा है. ‘छत्तीसगढ़ युवा सूचना क्रांति योजना’ के तहत हम महाविद्यालयों के अंतिम वर्ष के 1 लाख छात्र-छात्राओं को निःशुल्क लैपटाप एवं टेबलेट दे रहे हैं. हम देश के पहले राज्य हैं, जिसने युवाओं को कौशल विकास का अधिकार देने के लिए कानून बनाया है और 14 से 45 वर्ष तक के युवाओं को उनकी रूचि के अनुसार प्रशिक्षण पाने का अधिकार दिया है. ‘मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ब्याज अनुदान योजना‘ के जरिए 2 लाख रूपए से कम वार्षिक आय वाले परिवारों के युवाओं को मात्र 4 प्रतिशत ब्याज दर पर शिक्षा ऋण दिया जा रहा है. ‘मुख्यमंत्री युवा स्व-रोजगार योजना‘ के तहत 25 लाख रुपये तक बैंक ऋण हेतु गारंटी दी जा रही है.

युवाओं तथा खेल पर बोलते हुए उन्होनें कहा कि ‘मुख्यमंत्री युवा भारत दर्शन योजना’ के तहत युवाओं को विभिन्न राज्यों के महत्वपूर्ण स्थलों पर भ्रमण हेतु ले जाया जा रहा है ताकि वे अपने बेहतर कैरियर का निर्णय लेने में सक्षम हो सकें. बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में ‘लाइवलीहुड कॉलेज’ की सफलता से प्रेरित होकर अब हर जिले में ऐसे कॉलेज खोले जा रहे हैं. ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में युवाओं की भागीदारी और उनमें नेतृत्व क्षमता बढ़ाने हेतु ‘स्वामी विवेकानंद युवा प्रोत्साहन योजना’ प्रारम्भ की गई है. हम खेल प्रतिभाओं को निखारने और प्रोत्साहित करने ब्लॉक से लेकर राज्य स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित कर रहे हैं. हर जिले में स्टेडियम बनाए जा रहे हैं. सरगुजा में फुटबाल अकादमी शुरू हो गई है. रायपुर और कोण्डागांव में खेल अकादमी शीघ्र शुरू हो रही है. राजनांदगांव तथा रायपुर के स्टेडियम में एस्टोटर्फ लगाने का काम प्रगति पर है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में प्रथम बार आईपीएल मैच के सफल आयोजन से छत्तीसगढ़ को दुनिया के क्रिकेट मानचित्र में जगह मिली है. मुझे विश्वास है कि हमारे युवा बड़ी संख्या में कई खेलों में भी प्रदेश का नाम रौशन करेंगे.

रमन सिंह के अनुसार नक्सल प्रभावित अंचलों में आवासीय विद्यालय स्थापित कर 28 हजार से अधिक बच्चों की शिक्षा को निरंतरता दी गई है. रायपुर के ‘प्रयास’ आवासीय विद्यालय में शिक्षित-प्रशिक्षित बच्चों ने शानदार सफलता हासिल कर यह बता दिया है कि सुविधाएं मिलें तो वे कोई भी लक्ष्य पूरा कर सकते हैं. इस सफलता से प्रेरित होकर हमने जगदलपुर और अंबिकापुर में भी ‘प्रयास’ संस्थाएं शुरू कर दी हैं. आदिवासी अंचलों में पहले मात्र 40 महाविद्यालय थे, जो अब बढ़कर 71 हो गए हैं. हमने बस्तर में नया विश्वविद्यालय तथा मेडिकल कॉलेज खोल दिया है. सरगुजा में नया विश्वविद्यालय खोल दिया गया है और मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारी है. बस्तर तथा सरगुजा संभागों में जिला कॉडर बनाकर स्थानीय युवाओं को सरकारी नौकरी देने के अभियान को अच्छी सफलता मिली है. ‘आदिवासी यूथ हॉस्टल, दिल्ली’, ‘युवा कैरियर निर्माण योजना’ जैसे उपायों से इन युवाओं को लंबी छलांग लगाने के मनभावन साधन मिले हैं. मेरी कामना है कि आपका यह जोश और जज्बा बना रहे तथा आप नए छत्तीसगढ़ के प्रतीक बनकर दमकें.

देश के संदर्भ में उन्होनें कहा कि यह देखकर हमें दुख होता है कि हमारे कुछ पड़ोसी राज्यों सहित कई राज्यों में किसान भयंकर निराशा में जी रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सही नीतियों के कारण छत्तीसगढ़ के किसानों में खुशहाली और उत्साह देखते ही बनता है. राज्य की प्रमुख फसल धान का उत्पादन बढ़ाने और समर्थन मूल्य पर खरीदी की शानदार व्यवस्था करने से इस वर्ष धान खरीदी 71 लाख 35 हजार मीट्रिक टन के शिखर पर पहुंच गई है. जिससे किसान भाई-बहनों को सिर्फ एक वर्ष में लगभग 11 हजार करोड़ रुपये मिले हैं. लगभग 2 हजार करोड़ रूपए तो बोनस के रूप में दिए गए हैं और मैंने यह घोषणा भी कर दी है कि हर साल बोनस दिया जाएगा. विगत 9 वर्षों में किसान भाइयों से 4 करोड़ 24 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया और बोनस को मिलाकर लगभग 43 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया.

स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ को सेहतमंद राज्य बनाने और यहां के समस्त निवासियों को निःशुल्क चिकित्सा की सुविधाएं देने के लिए हमने देश में अपनी तरह की प्रथम ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना’ लागू करते हुए सभी 56 लाख परिवारों को 30 हजार रुपये तक वार्षिक उपचार की सुविधा दी है. सरकारी अस्पतालों में लाभकारी जेनेरिक दवाएं निःशुल्क देने की व्यवस्था की गई है. ‘संजीवनी कोष’ के अंतर्गत पहले मात्र 13 बीमारियों के निःशुल्क इलाज की सुविधा थी, जिसे अब बढ़ाकर 30 बीमारियों तक कर दिया गया है. गर्भवती महिलाओं को प्रसव हेतु अस्पताल पहुंचाने तथा घर वापसी हेतु निःशुल्क वाहन सुविधा 102 एवं सभी के लिए 24 घंटे दूरभाष पर निःशुल्क डॉक्टरी सलाह हेतु टोल-फ्री 104 सेवा भी शुरू हो रही है.

मुख्यमंत्री ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में चहुंओर अधोसंरचना का विकास किया गया है. सड़कों के अलावा रेलवे सम्पर्क बढ़ाने हेतु देश का सबसे नया और उपयोगी मॉडल बनाते हुए रेलवे कॉरीडोर निर्माण परियोजना को गति दी जा रही है, जो राज्य के आदिवासी बहुल उत्तरी क्षेत्र में तीव्र विकास का माध्यम बनेगी. औद्योगिक विकास का क्षेत्रीय संतुलन स्थापित करने हेतु व्यापक कार्य योजना अपनाई गई है. औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियों में विस्तार के कारण लाखों लोगों को बेहतर आमदनी वाला रोजगार मिला है.

नक्सलवाद पर बोलते हुए उन्होनें कहा कि अपनी संस्कृति और धरोहरों की रक्षा हेतु हम सतत् प्रयासरत हैं. अहिंसात्मक आंदोलन से आजादी प्राप्त करने का दुनिया का सबसे अनुपम उदाहरण हमारा भारत वर्ष है. इसके बावजूद देश में आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद की चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं. छत्तीसगढ़ को विरासत में ही नक्सलवाद की समस्या मिली थी. हमने विगत वर्षों में यह मिथक तोड़ने में सफलता प्राप्त की है कि यह नक्सलवाद किसी एक राज्य की समस्या है. वास्तव में नक्सलवाद आतंकवाद का दूसरा रूप है और यह समस्या भी समन्वित राष्ट्रीय प्रयासों से हल हो सकती है. नक्सली हिंसा के बावजूद हमने प्रभावित अंचलों में सामाजिक- आर्थिक विकास की गति बढ़ाने हेतु सार्थक कदम उठाए हैं.

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