85 फीसदी आबादी खुले में शौच करती है

नई दिल्ली | संवाददाता: छत्तीसगढ़ की बड़ी आबादी खुले में शौच करती है. सोमवार को राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में केन्द्रीय राज्य मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने यह जानकारी दी है. उन्होंनों स्वीकार किया कि छत्तीसगढ़ में अन्य राज्यों बिहार, झारखंड, ओडीशा तथा उत्तर प्रदेश के समान गांवों में महिलाओं के लिये कोई अलग शौचालय की व्यवस्था नहीं है. इस कारण वे खुले में शौच करने के लिये मजबूर हैं.

राज्यसभा में केन्द्रीय राज्य मंत्री उपेंन्द्र कुशवाहा ने जानकारी देते हुए बताया कि इन राज्यों में बड़ी संख्या में महिलाएं तथा लड़कियां शौचालय बनाने की हैसियत न होने के कारण इसका उपयोग नहीं कर पा रही है. उन्होंने अपने लिखित उत्तर में बताया कि “छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, ओडीशा तथा उत्तर प्रदेश में एक बड़ी संख्या स्वंय के संशाधन से शौचालय का निर्माण न कर पाने की वजह से खुले में जाने को मजबूर हैं.”


मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने जनगणना 2011 के आकड़ों के हवाले से बताया कि छत्तीसगढ़ की केवल 14.8 फीसदी आबादी शौचालयों का उपयोग करती हैं. उसी तरह से बिहार की 18.6 फीसदी, झारखंड की 8.3 फीसदी, ओडीशा की 15.3 फीसदी तथा उत्तर प्रदेश की 22.9 फीसदी आबादी शौचालयों का उपयोग करती है. राज्य मंत्री उपेंन्द्र कुशवाहा ने जानकारी दी कि केन्द्र सरकार की योजना ‘निर्मल भारत अभियान’ के माध्यम से गांवों में खुले में शौच न जाना पड़े इसके लिये शौचालयों का निर्माण राज्य सरकारों के मार्फत करवाया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से स्कूल में लड़कियों के लिये पृथक शौचालयों की व्यवस्था करवाई जा रही है. मंत्री के लिखित उत्तर से जाहिर है कि छत्तीसगढ़ में केन्द्र सरकार की इस योजना का समुचित ढ़ंग से लाभ नहीं उठाया गया है. अन्यथा क्या कारण है कि छत्तीसगढ़ में अभी भी 85.2 फीसदी आबादी खुले में शौच करती है जिससे बीमारिया बढ़ती हैं.

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