छत्तीसगढ़ का पंचायत बजट 16% कम

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में 2018-19 के पंचायत और ग्रामीण विकास के बजट में 16 प्रतिशत की कमी हो गई है. यह तब है, जब इस बजट को ग्रामीणों के लिहाज से सबसे बेहतर बजट प्रचारित किया जा रहा है.

कृषि में बजट का हाल आप यहां पढ़ चुके हैं. अब पंचायत और ग्रामीण विकास का बजट ग्रामीण इलाकों के लिये और हताश करने वाला है. पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च के विश्लेषण की मानें तो छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास की रकम में भारी कमी कर दी है.


पंचायत और ग्रामीण विकास के लिये 2016-17 का वास्तविक बजट 3,293 करोड़ था. इसी तरह 2017-18 का इस मद में बजटीय आवंटन 4,030 करोड़ था. इसी वर्ष संशोधित रक़म 4,625 करोड़ थी. अब यानी 2018-19 की पंचायत और ग्रामीण विकास के लिये बजटीय रक़म केवल 3,903 है, जो 2017-18 से 16 प्रतिशत कम है. यहां तक कि पंचायतों को हस्तांतरण के बजट में भी 3 प्रतिशत की कमी हुई है.

यह भी चौंकाने वाला तथ्य हो सकता है कि छत्तीसगढ़ ने इस साल ग्रामीण विकास के लिये कुल बजट का 5.4 प्रतिशत आवंटन किया है, जो देश के 18 राज्यों के इस मद में खर्च किये जाने वाली औसत रक़म से भी कम है. पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च के विश्लेषण के अनुसार बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, असम, तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे देश के 18 राज्यों का इस मद में बजट देखें तो पता चलता है कि इन राज्यों ने ग्रामीण विकास के मद में औसतन 5.6 प्रतिशत रक़म खर्च की है.

इन सबके बीच सुखद ये है कि छत्तीसगढ़ ने अपने ताजा बजट में स्वास्थ्य पर 5.5 प्रतिशत की रकम आवंटित की है, जो देश के 18 राज्यों की तुलना में अधिक है. शिक्षा के बजट में भी मामूली बढोत्तरी हुई है.

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