छत्तीसगढ़: शहीद के कफ़न के पैसे दो!

बीबीसी | रायपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सल हमलें में शहीद हुये परिवार से कफ़न के पैसे मांगे जा रहें हैं. छत्तीसगढ़ सरकार ने 2011 में माओवादी हमले में मारे गए जवान के परिजनों को 10 हज़ार रुपये की रिकवरी के लिए नोटिस थमाया है. सरकार ने अंतिम संस्कार में ये पैसे खर्च किए थे.

ये नोटिस ऐसे समय में थमाया गया है, जब छत्तीसगढ़ में तीन दिन में चार माओवादी हमलों में पुलिस के 13 जवान मारे गए हैं. बुधवार सुबह ही नक्सलियों ने पुलिस के अगवा जवान बसंत वीरा की हत्या कर दी जिनका सात अप्रैल को अपहरण कर लिया गया था.

राज्य के गरियाबंद ज़िले में 23 मई 2011 को माओवादी हमले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक समेत पुलिस के 9 जवान मारे गए थे. इनमें गरियाबंद के स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) किशोर पांडेय भी शामिल थे.

अब सोमवार को मारे गए जवान किशोर पांडेय के भाई कौशल पांडेय को गरियाबंद ज़िले के रक्षित निरीक्षक ने एक नोटिस जारी किया है.

नोटिस में कहा गया है, “अंतिम संस्कार एवं कफन-दफ़न हेतु तत्कालिक रूप से अशासकीय निधि वेलफेयर फंड से अग्रिम 10 हज़ार रुपये आपके परिवार को दिया गया था…तत्संबंध में तत्काल उक्त मद में राशि जमा करने का कष्ट करें.”

सरकार के इस नोटिस से मारे गए जवान के परिजन हैरान हैं.

वहीं ज़िले के एसपी अभिषेक पाठक ने कहा, “यह रक़म अशासकीय मद से दी गई थी, इसलिए इसे लौटाने के लिए नोटिस जारी करना बिल्कुल सही है.”

राज्य में पुलिस सुधार के लिए काम करने वाले ‘छत्तीसगढ़ पुलिस परिवार’ के संयोजक राकेश यादव कहते हैं, “यह गहरे क्षोभ का विषय है कि छत्तीसगढ़ सरकार जवानों को पहले तो कफ़न के लिए पैसे देती है और फिर उसकी वसूली के लिए बेशर्मी से नोटिस भी थमा देती है.”

उन्होंने कहा, “हमारे नीति निर्धारक पुलिस जवानों के प्रति क्या सोचते हैं, यह नोटिस उसी का प्रतीक है.”

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