पोंटी की कंपनियों के खिलाफ यूपी में जांच

रायपुर | विशेष संवाददाता: छत्तीसगढ़ में चना आपूर्ति करने वाली पोंटी चडढ़ा की कंपनी को लेकर कैग ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कई सवाल खड़े किये हैं. इधर खबर है कि चीनी मीलों की खरीदी में पोंटी चड्ढा की कंपनियों के खिलाफ जांच शुरु हो गई है. ज्ञात रहे कि गुरदीप सिंह यानी पोंटी चड्ढा और उसके भाई हरदीप की पिछले साल 17 नवंबर को दिल्ली में हत्या कर दी गई थी.

छत्तीसगढ़ में जिस कंपनी मेसर्स डिवाईन क्राप्स एंड एलाईड प्रोडक्ट्स प्राईवेट लिमिटेड को आदिवासियों को आपूर्ति किये जाने के लिये चना का ठेका मिला, उसकी मातृ संस्था पीबीएस फूड्स प्राईवेट लिमिटेड ने अपनी साथी कंपनियों के साथ मिल कर कैसे फर्जीवाड़ा करके ठेके हथियाये, कैग ने उसका सनसनीखेज रहस्योद्घाटन किया है.


कैग ने उत्तरप्रदेश में बच्चों के पोषाहार की आपूर्ति को लेकर पोंटी की कंपनियों की हकीकत को उजागर करते हुये लिखा है कि इसके लिये उत्तर प्रदेश ने 1993.56 करोड़ की धनराशि व्यय की. राज्य सरकार ने इसके लिये राज्य को 5 जोनों में विभाजित किया और सरकार ने सभी में इन्हीं पांच कंपनियों को योग्य पाया. पोंटी की ये कंपनियां हैं-
1. मेसर्स ग्रेट वैल्यू फूड्स
2. मेसर्स हेल्थ केयर एनर्जी फूड प्राइवेट लिमिटेड
3. मेसर्स क्रिस्टी फ्राइडग्राम इंडस्ट्री
4. मेसर्स त्रिकाल फूड्स एंड एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड
5. मेसर्स पी बी एस फूड्स प्राइवेट लिमिटेड

अब जरा इन कंपनियों के कारनामों को देखें पता चलता है कि किस तरह ठेका पाने के लिये इन कंपनियों ने जालसाजी की. ‘छत्तीसगढ़ खबर’ के पास जो दस्तावेज उपलब्ध हैं, उसके अनुसार ये पांचों कंपनियां एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं. मेसर्स ग्रेट वैल्यू फूड्स और मेसर्स हेल्थ केयर एनर्जी फूड प्राइवेट लिमिटेड दोनों ही कंपनियों में निदेशक राजेंद्र सिंह चड्ढ़ा हैं तो मेसर्स क्रिस्टी फ्राइडग्राम इंडस्ट्री और मेसर्स त्रिकाल फूड्स एंड एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड दोनों ही कंपनियों के निदेशक का पद प्रशांत कुमार संभाल रहे थे. यही प्रशांत कुमार मेसर्स हेल्थ केयर एनर्जी फूड प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक रहे हैं.

510 तूरब नगर, गाजियाबाद में रहने वाली प्रीति अग्रवाल मेसर्स त्रिकाल फूड्स एंड एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक हैं तो उसी पते पर रहने वाले सुधीर अग्रवाल मेसर्स पी बी एस फूड्स प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक हैं. इसी तरह मेसर्स ग्रेट वैल्यू फूड्स और मेसर्स क्रिस्टी फ्राइडग्राम इंडस्ट्री ने अपनी तकनीकी बोलियों में एक ही वैट रजिस्ट्रेशन का इस्तेमाल किया है. हद तो ये है कि इन कंपनियों ने बच्चों को आपूर्ति की जाने वाली पोषाहार का ठेका पाने के लिये फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों तक का सहारा लिया. मेसर्स हेल्थ केयर एनर्जी फूड प्राइवेट लिमिटेड के पास काम का अनुभव नहीं था तो उसने मेसर्स ग्रेट वैल्यू फूड्स का प्रमाणपत्र ही अपने दस्तावेजों में संलग्न कर दिया.

खबर है कि पोंटी चडढ़ा की कंपनियों के खिलाफ उत्तरप्रदेश में अब जांच शुरु हुई है. राज्य सरकार ने कम से कम 15 आईएएस व 11 उप निबंधकों समेत 40 अफसरों को नोटिस भेज कर जवाब-तलब किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ में चना आपूर्ति में जिस तरह से मेसर्स डिवाईन क्राप्स एंड एलाईड प्रोडक्ट्स प्राईवेट लिमिटेड और मेसर्स प्राईम विजन लिमिटेड को ठेका दिया गया, उस मामले की जांच की जाये तो कई राज सामने आयेंगे.

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