छत्तीसगढ़: बस्ते के बोझ से मुक्ति

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में छोटे-छोटे बच्चों को बस्ता के बोझ से मुक्त करने की अनोखी पहल की गई है. प्राथमिक शाला के बच्चे अब बस्ता लेकर स्कूल नहीं जाते, बल्कि उनकी किताबें और कापियां स्कूल में ही रखी जाती हैं. इसके लिए बाकायदा प्रत्येक कक्षा में बच्चों के लिए अलग-अलग रैक का इंतजाम भी किया गया है.

बच्चे सिर्फ नोटबुक लेकर घर जाते हैं और नोटबुक लेकर स्कूल आते हैं. बच्चों को दो-दो सेट पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं. एक सेट घर में और एक स्कूल में रखा गया है.

बालोद जिले के ग्राम परसाही से मुंगलवार को इसकी शुरुआत की गई. यहां के स्कूल में कक्षा पहली से पांचवीं तक के बच्चे बस्ता लेकर स्कूल नहीं आए. उन्हें स्कूल में ही किताबें, कापियां और पेंसिल मिल गईं.

स्कूलों में बच्चों की पुस्तकें, कापियां आदि रखने के लिए प्रत्येक कक्षा में छात्रों की संख्या के अनुसार रैक में बॉक्स भी बनाया गया है. इन बॉक्सों में बच्चों के नाम लिखे गए हैं. इन बॉक्सों में ही बच्चे अपनी किताब-कापियां रखते हैं.

बालोद के कलेक्टर राजेश सिंह राणा ने बताया कि इस योजना की शुरुआत जिले के पांचों विकासखंड के दो-दो प्राथमिक शालाओं में की गई है.

उन्होंने बताया कि बालोद विकासखंड के परसाही और परेर्गुड़ा की प्राथमिक शाला, गुंडरदेही विकासखंड के धरमी और चाराचार, गुरूर विकासखंड के मुजगहन और भुलनडबरी, डौंडीलोहारा विकासखंड के कापसी और जोगीभाट, डौंडी विकासखंड के ककरेल और बासाटोला की प्राथमिक शाला में इसकी शुरुआत की गई है.

बच्चों को बस्ता के बोझ से मुक्त करने के लिए उन्हें दो-दो सेट पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं. एक सेट पुस्तक घर पर और एक सेट स्कूल में रखी गई है.

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