छत्तीसगढ़: कुसमुंडा खदान का विरोध

कोरबा | अब्दुल असलम: छत्तीसगढ़ के कुसमुंडा में हुई जनसुनवाई में ग्रामीणों ने खदान के विस्तार का विरोध किया. छत्तीसगढ़ के कोरबा में स्थित दुनिया की सबसे बड़ी बनने जा रही कुसमुंडा की खुली खदान के लिए बुधवार को जनसुनवाई का आयोजन हुआ. पहले से ही खदान खोले जाने का विरोध कर रहे प्रभावितों ने पर्यावरणीय जनसुनवाई के दौरान खुलकर विरोध कर एक स्वर में कह दिया कि किसी भी हाल में हम अपनी ज़मीन कोयला निकालने के लिए नहीं देंगे.

प्रभावित ग्रामीण इस बात का भी विरोध कर रहे थे कि खदान के लिए प्रभावित स्थल से 10 किमी दूर कुसमुंडा के आदर्श नगर स्टेडियम में जनसुनवाई क्यों की जा रही है.


ग्रामीणों ने ख़दान उसी शर्त में खोलने में सहमति देने की बात कही जब प्रभावित हर खातेदार को नौकरी दी जायेगी. मौके पर मौजूद प्रशासन ने ग्रामीणों के विरोध को दर्ज करते पर्यावरणीय जनसुनवाई पूरी कर ली.

दरअसल छत्तीसगढ़ के उद्योग नगरी कोरबा जिले की कुसमुंड़ा खुली खदान की उत्पादन क्षमता 18 मिलियन टन से बढ़ाकर 50 मिलियन टन करने जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई के लिए बुधवार को पर्यावणीय जनसुनवाई का आयोजन किया गया था.

प्रस्तावित खदान में पांच गांव खोडरी, खैरभवना, चुरैल, अमंगाव और गेवरा के 7 हजार से अधिक भू-स्वामियों की लगभग 11 सौ हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है. लिहाजा सभी खातेदार नौकरी की मांग कर रहे है. बुधवार को हुई पर्यावरणीय जनसुनवाई के दौरान विरोध के उपजे स्वर को देखते मौके पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी.

जनसुनवाई के दौरान कुल 26 लिखित सुझाव और शिकायत प्रशासन को प्राप्त हुए वहीं अपने तर्को के जरिए कटघोरा विधायक लखनलाल देवांगन सहित 38 मौखिक शिकायत भी दर्ज की गई. इस दौरान कई ऐसे नेता भी देखे गए जो केवल अपना राजनैतिक लाभ लेने के लिए भीड़ को उकसा रहे थे लेकिन ग्रामीणों ने किसी की बात में न आते हुए अपने विवेक से काम लेते अपनी उपजाऊ ज़मीन किसी भी हाल में नहीं ज़मीन नहीं देने की बात कही.

प्रशासन ने प्राप्त सभी शिकायत और सुझाव को सरकार को भेजने की बात कही है.

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