राज्यों की मदद से महंगाई पर नियंत्रण: पासवान

रायपुर | एजेंसी: केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने मंगलवार को अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान कहा कि राज्य सरकारों की मदद के बगैर महंगाई पर काबू नहीं पाया जा सकता है. उन्होंने बताया कि देश के पास अगले एक साल तक के लिए खाद्यान्नों का पर्याप्त भंडार है.

रामविलास पासवान ने जोर देकर कहा कि छत्तीसगढ़ सहित देश के किसी भी राज्य में किसानों का अहित नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली और धान खरीदी कार्यो के कंप्यूटरीकरण की विशेष रूप से प्रशंसा की.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पासवान को बताया कि राज्य निर्माण के समय छत्तीसगढ़ की सहकारी समितियों में लगभग पांच लाख मिट्रिक टन के आसपास धान खरीदी होती थी, विगत कुछ वर्षो में राज्य सरकार के बेहतर प्रबंधन के फलस्वरूप यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 80 लाख टन तक पहुंच गया है.

उन्होंने कहा, “हर साल हमारे यहां 70 से 80 लाख टन तक धान खरीदी हो रही है. हमने अपने किसानों को धान पर समर्थन मूल्य के साथ पिछले वर्ष 2012-13 में 270 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी है और इस वर्ष 300 रुपये प्रति क्विंटल तीन सौ रुपये की दर से प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की है. चूंकि धान खरीदी में जोरदार उछाल आया है, इसलिए हमें खरीदे गए धान के सुरक्षित भंडारण के लिए अतिरिक्त गोदामों की जरूरत है.”

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने पासवान को बताया कि राज्य में धान की मिलिंग क्षमता का समुचित उपयोग करने के बावजूद बारिश के दौरान हर साल लगभग पंद्रह लाख टन धान खुले स्थानों में कैप कवर से ढककर रखना पड़ता है, इसके फलस्वरूप भंडारित धान की गुणवत्ता प्रभावित होने की भी आशंका बनी रहती है.

उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार हमें गोदाम निर्माण के लिए राशि उपलब्ध कराए तो हम एक वर्ष के भीतर गोदामों का निर्माण करवा सकते हैं.

रमन सिंह ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि छत्तीसगढ़ में अनाजों के सुरक्षित भंडारण के लिए नए गोदामों का निर्माण केंद्र सरकार की एक योजना, पीईजी के तहत करवाया जा रहा है. इसके अंतर्गत गोदाम निर्माण के लिए आवश्यक भंडारण क्षमता की गणना प्रत्येक खरीफ तथा रबी वर्ष में उपार्जित चावल और गेहूं की मात्रा को प्रमुख आधार माना जाता है.

उन्होंने पासवान से आग्रह किया कि राज्य सरकारों की सहमति या परामर्श के बिना विकेंद्रीकृत अनाज उपार्जन योजना या समर्थन मूल्य पर अनाज उपार्जन योजना में कोई नीतिगत संशोधन नहीं किया जाए.

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