छत्तीसगढ़ सीएम को गोली और बोली

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा अब व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप में उलझ गई है. भूपेश बघेल ने सीएम रमन सिंह के खिलाफ आग उगलते हुये कहा कि रमन सिंह जब बस्तर जाते हैं, तब माओवादी गोलियां क्यों नहीं बरसाते. उनका आरोप था कि रमन सिंह की नक्सलियों से सांठगांठ है. मुख्यमंत्री रमन सिंह ने भी तुरंत जवाब दिया- मुझे जब गोली लगेगी, तभी भूपेश बघेल मानेंगे.

भूपेश बघेल ने भी फिर पलटवार किया- सीएम सौ साल तक जीये तथा दूसरों को भी जीने दे.


उल्लेखनीय है कि बुधवार को अपने बिलासपुर प्रवास के समय कांग्रेस के भूपेश बघेल ने कटाक्ष किया था कि जब मुख्यमंत्री बस्तर जाते हैं तो नक्सली गोली नहीं चलाते हैं. उसके जवाब में मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा था क्या कांग्रेसी मुझे गोली लगने पर ही मानेंगे.

कुल मिलाकर मुद्दा बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे से हटकर राजनीतिक दलों के बीच आपसी होड़ में तब्दील हो गया है. गौरतलब है कि 2011 में नक्सलियों द्वारा मारे गये एसपीओ किशोर पांडेय के अँतिम संस्कार कराने के खर्चे को वापस मांगा गया था जिसके बाद मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप करते हुये उस रक्षित निरीक्षक नीलेश द्विवेदी को निलंबित कर दिया गया है. ऐन नक्सल हमलों में लगातार तीन दिन में 13 जवानों के शहीद होने के बाद ही 2011 में शहीद हुये जवान के परिजनों से अंतिम संस्कार के पैसे वापस मांगने पर सरकार की अच्छी-खासी भद्द हो चुकी है.

इससे पहले भी नक्सल हमलों में मारे गये जवानों के वर्दियों को कचरे में फेके जाने को लेकर बवाल मच चुका है. एक गैर सरकारी संगठन के आकड़ों के अनुसार पिछले 11 सालों में हर दूसरे दिन नक्सल मुठभेड़ में एक नागरिक या जवान या नक्सली की मौत होती रही है. उसी गैर सरकारी संगठन के अनुसार पिछले 11 सालों में देशभर में नक्सली वारदातो में सबसे ज्यादा मौते छत्तीसगढ़ में ही हुई है.

बहरहाल राज्य के मुख्यमंत्री तथा प्रमुख विपक्षी दल के अध्यक्ष के बीच चल रहे वाकयुद्ध से बस्तर में बैठे नक्सलियों का कुछ बिगड़ेगा कि नहीं यह कहा नहीं जा सकता परन्तु इससे राज्य के एक मुख्य समस्या नक्सलवाद पर राजनीतिक दल बंटे हुये हैं यह स्पष्ट हो गया है.

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