रेडियो आज भी लोकप्रिय- रमन सिंह

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा रेडियो आज के दौर में भी लोकप्रिय है. उन्होंने शनिवार को छत्तीसगढ़ रेडियो श्रोता संघ द्वारा आयोजित सम्मेलन में यह बात कही है. उल्लेखनीय है कि हर वर्ष 20 अगस्त को रेडियो श्रोता संघ द्वारा एक सम्मेलन का आयोजन किया जाता है. दरअसल, स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में 20 अगस्त 1921 को मुम्बई में कुछ क्रांतिकारी मित्रों ने बेतार संदेश का प्रसारण मुम्बई, मद्रास और लाहौर के बीच किया. यह एक महत्वपूर्ण घटना थी इसे याद करने के लिए छत्तीसगढ़ श्रोता संघ ने हर साल श्रोता दिवस आयोजित करने की परम्परा शुरू की है. वर्ष 2007 से लगातार रेडियो श्रोता सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है.

इस सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि रेडियो पहले भी लोकप्रिय था और टेलीविजन तथा संचार क्रान्ति के युग में भी वह आज भी लोकप्रिय है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र ने विगत 50 वर्ष से भी ज्यादा समय से छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति, लोक संगीत और लोक गीतों को जन-जन तक पहुंचाने तथा लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.


मुख्य अतिथि की आसंदी से सम्मेलन और विचार गोष्ठी को सम्बोधित करते हुये छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा – छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल अबूझमाड़ जैसे कठिन इलाके में भी मैंने ग्रामीणों के बीच रेडियो का आकर्षण देखा. आजादी की लड़ाई के दौरान 20 अगस्त 1921 को हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने छोटे रूप में ही सही, लेकिन जन-जागरण का एक बड़ा अभियान मुम्बई में अपने भूमिगत रेडियो स्टेशन के जरिए शुरू किया था. महान क्रान्तिकारी नेताजी सुभाषचन्द्र बोस ने विदेशी धरती से रेडियो के जरिए भारतीयों में देशभक्ति का संचार किया था.

रमन सिंह ने कहा कि आज के युग में रेडियो आम जनता तक सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं की जानकारी पहुंचाने के साथ-साथ सूचना, शिक्षा और मनोरंजन और समाज के साथ कनेक्टिीविटी का एक बड़ा माध्यम है. डॉ. रमन सिंह ने रेडियो श्रोता सम्मेलन के लगातार वार्षिक आयोजनों के लिए छत्तीसगढ़ रेडियो श्रोता संघ के संरक्षक अशोक बजाज और अध्यक्ष परसराम साहू सहित सभी पदाधिकारियों को बधाई दी.

मुख्यमंत्री ने कहा – समाचार पत्रों के जरिए सूचनाएं शहरी क्षेत्रों और उनके आसपास के इलाकों में तो पहुंच जाती है, लेकिन छत्तीसगढ़ की बहुत बड़ी आबादी आज भी दूरदराज गांवों में रहती है, जहां हल्बी, गोंडी आदि स्थानीय बोलियों में लोगों तक विकास योजनाओं की जानकारी पहुंचाने में रेडियो की बड़ी भूमिका हो सकती है.

मुख्यमंत्री ने रेडियो के पुराने और सुनहरे दिनों को याद करते हुए कहा प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की अंतिम यात्रा का आंखो देखा हाल आकाशवाणी के जरिए देशभर में प्रसारित किया गया था, जिसे मैंने भी सुना था. रेडियो सिलोन से उस दौर में प्रसारित होने वाले ‘बिनाका गीतमाला’ और उसमें उदघोषक अमीन सयानी की आवाज का अपना आकर्षण था. रेडियो पर प्रसारित होने वाली क्रिकेट कॉमेन्ट्री के भी लाखों-करोड़ों दीवाने थे. परीक्षा के दिनों में भी विद्यार्थी रेडियो पर क्रिकेट मैचों का आंखों देखा हाल सुनने के लिए बेचैन रहते थे और कई बार माता-पिता की डांट भी सुननी पड़ती थी.

डॉ. रमन सिंह ने कहा- उस दौर में ऐसे कार्यक्रमों के जरिए रेडियो की लोकप्रियता पराकाष्ठा पर पहुंच गई थी. रेडियो पर प्रसारित होने वाले फरमाईशी गीतों के कार्यक्रमों में हमारे देश के कई शहरों और कस्बों के नाम जनता की जुबान पर आ गये थे. मेरा कस्बा कवर्धा भी उसमें शामिल था.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने कहा – रेडियो अब तो हमारे मोबाइल फोन पर भी उपलब्ध है, लेकिन रेडियो सेट को छूते ही पुराने दिनों की याद ताजा हो जाती है.

अपने अध्यक्षीय उदबोधन में अशोक बजाज ने कहा- आकाशवाणी के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने ‘रमन के गोठ’ कार्यक्रम के जरिए रेडियो के महत्व को पुनः प्रतिपादित किया है.

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