बस्तर में खत्म होगी नक्सल समस्या

रायपुर | संवादताता: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने कहा है कि राज्य में उद्योग और व्यापार के विकास में सबसे बड़ा योगदान किसानों का है. मुख्यमंत्री ने राज्य में रोजगार की व्यापक संभावनाओं को ध्यान में रखकर नॉनकोर सेक्टर के अन्तर्गत लघु वनोपज, कृषि उपज, सौर ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, आटो मोबाईल, पर्यटन और भवन निर्माण जैसे उद्योगों में पूंजी निवेश बढ़ाने की जरूरत पर विशेष रूप से बल दिया है. उन्होंने कहा कि सरगुजा में नक्सल समस्या खत्म हो गई है, बस्तर में भी यह समस्या आने वाले वर्षों में खत्म हो जायेगी. रमन सिंह ने टेलीविजन चैनल सीएनबीसी आवाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘उभरता हुआ छत्तीसगढ़’ में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किये.

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ में धान के लगातार बढ़ते उत्पादन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बार खरीफ के मौसम में हमारे यहां किसानों ने सहकारी समितियों में निर्धारित समर्थन मूल्य पर लगभग नौ हजार करोड़ रुपए का धान बेचा है और उन्हें इस कीमत के साथ लगभग दो हजार करोड़ रुपए का बोनस भी मिलने जा रहा है. हम वर्ष 2012-13 के लिए सहकारी समितियों में धान बेचने वाले किसानों को 270 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बोनस देने जा रहे हैं. प्रदेश के दस लाख से अधिक किसानों को इसका लाभ मिलेगा. इस प्रकार छत्तीसगढ़ के गांवों में इस बार करीब ग्यारह हजार करोड़ रुपए की अतिरिक्त धनराशि पहुंच रही है. इसके फलस्वरूप किसानों के जीवन में समृध्दि आएगी और गांवो की अर्थ व्यवस्था सुधरेगी. निश्चित रूप से इससे बाजार तथा राज्य की अर्थव्यवस्था में भी एक बड़ा उछाल आएगा. इससे वाणिज्य और उद्योग जगत की गतिविधियों का भी तेजी से विकास होगा.


मुख्यमंत्री ने कहा कि देश भले ही आज आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है, लेकिन छत्तीसगढ़ जीडीपी की वृध्दि दर विगत कुछ वर्षों से लगातार दहाई अंकों में चल रही है. छत्तीसगढ़ ने कृषि क्षेत्र में 6.47 प्रतिशत की ग्रोथ हासिल की है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है.
उन्होंने कहा कि वर्तमान 12वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक हमने राज्य में लगभग 30 हजार मेगावाट तक बिजली उत्पादन की क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. गुजरात के बाद छत्तीसगढ़ देश का दूसरा ऐसा राज्य है, जहां प्रति व्यक्ति बिजली की औसत वार्षिक खपत सबसे अधिक है. राज्य निर्माण के समय हमारे यहां यह खपत 750 यूनिट थी जो अब बढ़कर डेढ़ हजार यूनिट से भी यादा हो गई है. बिजली की प्रति व्यक्ति खपत बढ़ना निश्चित रूप से किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था के विकास की भी निशानी है.

रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने रेल कॉरीडोर का पीपीपी मॉडल देश को दिया है. विगत 40 वर्षों में राज्य में 40 किलोमीटर भी रेल लाईन नहीं बन पाई, जबकि पिछले वर्ष राज्य शासन द्वारा केन्द्र को उत्तरी छत्तीसगढ़ में रेल यातायात की सुविधा बढ़ाने के लिए पीपीपी मॉडल पर आधारित रेल कॉरीडोर का प्रस्ताव दिया गया जिसे केन्द्र ने स्वीकार कर लिया है. इस रेल कॉरीडोर के बनने पर यात्री सुविधाओं के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास में और यादा तेजी आएगी.

रमन सिंह ने कहा कि इस समय हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता कोर सेक्टर में इनके लिए अब तक किए जा चुके एमओयू पर आधारित परियोजनाओं को पूर्ण करवाने और नॉनकोर सेक्टर के उद्योगों में ज्यादा से ज्यादा निवेश आकर्षित करने की है. यही वजह है कि राज्य सरकार ने अब नए एमओयू लघु वनोपज, सूचना प्रौद्योगिकी,सौर ऊर्जा, आटो मोबाईल, कृषि उपज तथा भवन निर्माण जैसे नॉनकोर सेक्टर अथवा डाउन स्ट्रीम के उद्योगों को बढ़ावा देने और उनके लिए निवेशकों को आमंत्रित करने की है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोर सेक्टर के बड़े उद्योगों में अगर आठ हजार करोड़ से दस हजार करोड़ तक निवेश होता है तो उनमें चार-पांच सौ से ज्यादा लोगों को सीधे तौर पर रोजगार नहीं मिल पाता, जबकि नॉनकोर सेक्टर के उद्योगों में मात्र 5 हजार करोड़ रुपए लगाकर 20 हजार लोगों को रोजगार के अवसर दिए जा सकते हैं. उन्होंने नॉनकोर सेक्टर में पूंजी निवेश बढ़ाने पर विशेष बल दिया.

मुख्यमंत्री ने परिचर्चा में नक्सल समस्या के कारण औद्योगिक विकास में विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंकाओं का समाधान करते हुए बताया कि राज्य के बस्तर और सरगुजा सहित नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हमने पुलिस और जनता के सहयोग से इसके निराकरण की ठोस पहल की है. पुलिस जवानों को कांकेर के जंगलवार फेयर कॉलेज में प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है. प्रदेश में हजारों की संख्या में नए पुलिस जवानों की भर्ती की गई है. सरगुजा अंचल में नक्सल समस्या लगभग खत्म हो गई है जबकि बस्तर में भी अगले कुछ वर्षों में यह समस्या समाप्त हो जाएगी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल समस्याग्रस्त दंतेवाड़ा में राज्य शासन द्वारा एशिया के सबसे बड़े एजुकेशन हब का विकास किया जा रहा है. दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जैसे नक्सल पीड़ित जिलों में युवाओं को रोजगार प्रशिक्षण देने के लिए आजीविका कॉलेज खोले गए हैं. इस मौके पर वाणिज्य और उद्योग मंत्री राजेश मूणत ने भी अपनी राय रखी.

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