रतनपुर में मनमाफिक बांट दिए तालाब

रतनपुर | उस्मान कुरैशी: छत्तीसगढ़ की मछुआ नीति को दरकिनार कर नगर पंचायत परिषद ने तालाबों को ठेके पर आबंटन करने प्रस्ताव पास कर दिया है. तालाबों के आबंटन को लेकर मछुआरों ने तीखा आक्रोश है. मामले की शिकायत कलेक्टर से कर परिषद के प्रस्ताव पर रोक लगाने की मांग मछुआरों व जनप्रतिनिधियों ने की है.

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के नगर पंचायत रतनपुर के आधीन 157 तालाबें है. क्षेत्र के मछुआरे इन तालाबों को ठेके पर लेकर मत्स्य पालन का व्यवसाय करते है. इससे बड़ी राशि राजस्व के रूप में शासन को भी मिलती है. नगर पंचायत कार्यालय ने 20 जून 2014 को सूचना प्रकाशित कर 98 तालाबों को ठेके पर देने के लिए आवेदन मंगाए थे. तालाबों को ठेके पर देने मछली पालन विभाग के जिला अधिकारी की अगुवाई में तय नियमों के हिसाब से समिति का गठन नहीं किया गया.

नगर पंचायत की परिषद ने 16 जुलाई को आयोजित बैठक में शासन की मछुआ नीति को दरकिनार कर मनमाने तरीके से 51 तालाबों के आबंटन का प्रस्ताव पारित कर दिया. उपलब्ध दस्तावेजों में तो ऊंचे दर भरने वालों को दरकिनार कर कम बोली लगाने लोगों को आबंटन किया गया है. अपंजीकृत मछुआरा सहकारी समितियों को तालाब आबंटित किए गए है.

परिषद के द्वारा तालाबों के आबंटन के लिए पारित प्रस्ताव पर भाजपा रतनपुर मंडल के अध्यक्ष शिव मोहन बघेल ने तीखी नाराजगी जताई है. उन्होने मछ्रुआ समाज के प्रतिनिधियों के साथ कलेक्टर से भेट कर मामले की जांच की मांग की है.

पंजीकृत महामाया मछुवा सहकारी समिति के अध्यक्ष घासीराम उर्फ गुहा कहरा तीखी नाराजगी जताते हुए कहते है परिषद ने तालाबों के आबंटन में मछुआ नीति का पालन नही किया है. मछुआ नीति में पंजीकृत मछुआरा सहकारी समितियों को प्राथमिकता देने स्पष्ट उल्लेख है. जिसका पालन नही किया गया है.

इनका आरोप है कि परिषद ने गलत तरीके से अपंजीकृत जै भैरव बाबा मछुआ समिति व मां काली समिति को तालाब आबंटित करने के प्रस्ताव पास कर दिए है. तालाबों को दस सालों के बजाए तीन साल के लिए पट्टे में दी जा रही है. कुछ तालाबों को तो बिना सूचना प्रकाशन के ही आबंटित कर दिया है. उन्होने तालाबों के आबंटन में बड़े पैमाने पर लेन देन का भी आरोप लगाया है.

विवादित तालाबों के आबंटन पर रोक- रात्रे
पूरे मामले में नगर पंचायत अध्यक्ष घनश्याम रात्रे का कहना है कि विवादित तालाबों का आबंटन रोक दिया गया है. तालाबों के आबंटन में मछुआ नीति का पूरी तरह पालन किया गया है. दस वर्षीय पट्टे पर देने शासन से मार्गदर्शन मांगा जा रहा है.

क्या है मछुआ नीति
छत्तीसगढ़ मछुआ नीति के तहत शासन ने तालाबों को ठेके पर देने के लिए 24 फरवरी 2003 को आदेश जारी किए है. जारी मछुआ नीति के मुताबिक तालाबों को ठेके पर देने के लिए प्राथमिकताएं तय की गई है. तय नियमों के मुताबिक वरीयता में पंजीकृत मछुआरा सहकारी समितियों मछुआ समूह मछुआ व्यक्ति विस्थापित परिवार के बाद स्व सहायता समूहों को रखा गया है.

सामान्य क्षेत्र में ढीमर निशाद केंवट कहार मल्लाह जाति के पंजीकृत मछुआरा सहकारी समितियों को प्राथमिकता देने व अनुसूचित क्षेत्रों में अजा अजजा वर्ग के मत्स्य सहकारी समितियों को प्राथमिकता देने की बातें कही गई है. ठेके का पट्टा दस वर्षो के लिए जारी किया जाना है.

मछुआ नीति के जारी आदेश के बिंदु 8.3 में नगरीय निकायों के संदर्भ में कहा गया है कि नगरीय निकाय अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले तालाबों के पट्टे जारी करने 15 दिन पूर्व मुनादी व लिखित सूचना जारी करें. आवेदन प्राप्त होने नगर निकाय की गठित समिति हितग्राही का चयन कर पट्टा दे सकेगी. गठित समिति में मछली पालन विभाग के जिला अधिकारी के प्रभारी अधिकारी होने की बात कही गई है.

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