धान की भूसी से बिजली उत्पादन

बलौदाबाजार | एजेंसी: छत्तीसगढ़ में धान की भूसी का उपयोग बिजली बनाने में किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ के बालौदाबाजार जिले के सिमगा विकासखंड के समीप ग्राम हरिनभट्टा में स्थित बायोमॉस आधारित विद्युत उत्पादन इकाई मेसर्स नीरज पॉवर से 7.5 क्षमता मेगावॉट विद्युत का उत्पादन किया जा रहा है.

इसमें से 80 प्रतिशत विद्युत धान की भूसी से उत्पादित की जा रही है, जिससे विद्युत उत्पादन के लिए कोयले की आवश्यकता बहुत ही कम हुई है. इस प्रकार के संयंत्रों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार की ओर से छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण, क्रेडा द्वारा कार्य किया जा रहा है.


छत्तीसगढ़ के इस बायोमॉस विद्युत उत्पादन इकाई के संचालक नीरज अग्रवाल ने बताया कि जिला स्तरीय समिति द्वारा संयंत्र का निरीक्षण नियमानुसार कर बायोमॉस के निर्धारित मात्रा में उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए जांच की जाती है. यह इकाई सन् 2006-7 में शुरू हुई थी.

बायोमॉस आधारित विद्युत इकाई धान की भूसी से संचालित किए जाने के कारण निकटतम गांवों के किसानों की धान की भूसी को लगभग दो हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से इकाई द्वारा खरीदी जा रही है. इकाई द्वारा उत्पादित की गई ऊर्जा को छत्तीसगढ़ विद्युत वितरण कंपनी को दी जा रही है. उन्होंने बताया कि इकाई में 50 कर्मचारी कार्यरत हैं.

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