छत्तीसगढ़: करोड़ों रुपये का धान बर्बाद हो रहा

रायपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ के अधिकांश जिलों में पिछले एक सप्ताह से रुक-रुक कर हो रही बारिश की वजह से और उचित रखरखाव के अभाव में करोड़ों रुपये का धान भीगकर सड़ने और अंकुरित होने लगा है.

भीगे धान को सड़ने से बचाने के लिए सहकारी समिति को गीले धानों को पलटने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन बारदानों (बोरी) की कमी के कारण इस काम में दिक्कत आ रही है.

सहाकारिता विभाग के सहायक पंजीयक एन.के .आर. चंद्रवंशी ने बताया कि जिन समितियों में धान भीगा है, उन्हें धान पलटने का निर्देश दिया गया है. राजधानी से लगे धमतरी जिले में समर्थन मूल्य में 48 लाख 34 हजार 419 क्विंटल का धान खरीदा गया. 27 फरवरी से अब तक 40 लाख 88 क्विंटल धान ही इन समितियों से लिए गए हैं.

अभी सोसाइटियों में 8 लाख 34 हजार क्विंटल से ज्यादा धान रखे हुए हैं. 23 फरवरी को हुई तेज बारिश के कारण कई समितियों में पानी भर गया था. खुले में धान पड़े होने तथा पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के अभाव के कारण धान की छल्लियां भीग गई थीं.

पांच दिन बाद भी आसमान बदली छाई हुई है. धूप नहीं निकलने से धान के भीगे बोरे सड़ने लगे हैं. छल्लियों के निचले बोरों के धान में अकुंरण होने लगा है.

भोथलीए लिमतरा और संबलपुर समितियों के धान में जरई निकल आई है. ज्यादा नुकसान से बचने के लिए सहकारिता विभाग ने धान के बोरों को पलटने का निर्देश दिए हैं, लेकिन बारदानों की कमी के कारण इसमें दिक्कत आ रही है.

कुछ समितियों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) राशन के बारदाने काम में लाए जा रहे हैं. कमोबेश यही स्थिति सूबे के बारिश प्रभावित ज्यादातर जिलों में हैं.

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