RSS: साल में 6 दिन नया गणवेश

रायपुर | संवाददाता: RSS के स्वंयसेवक साल में 6 दिन ही फुल पैंट पहनेंगे. केवल छत्तीसगढ़ की क्यों यह नियम पूरे दुनिया के राष्ट्रीय स्वंय सेवकों पर लागू होगा. संघ का नया गणवेश केवल सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिये ही है.

संघ के छत्तीसगढ़ के पदाधिकारी पीयुष पाणिदिवेदी का कहना है कि संघ के वार्षिक रूप से होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों में ही स्वंयसेवकों के लिये नया गणवेश अनिवार्य है. रोजमर्रा की शाखा में स्वंयसेवक पुरानी निक्कर पहनकर आ सकते हैं.


उल्लेखनीय है कि पूरे छत्तीसगढ़ में संघ के स्वंयसेवकों ने इस विजयादशमी के दिन अफना गणवेश धारण किया था. जिसमें हाफ की जगह पर फुल पैंट पहना गया. दिल्ली से छत्तीसगढ़ के लिये दो खेप में 20 लाख गणवेश रायपुर के जागृति मंडल पहुंचा था.

गौरतलब है कि इससे पहले तीन बार संघ के गणवेश में बदलाव हो चुका है. संघ के गणवेश में पहला बदलाव साल 1939 में डॉक्टर हेडगेवार के समय में हुआ था. उस समय खाकी कमीज को बदलकर सफेद कमीज कर दी गई थी. तब संघ का मानना था कि खाकी कमीज पहनने से उनकी ड्रेस अंग्रेजी सेना की ड्रेस से हूबहू मिलती मिलती है.

संघ की ड्रेस में दूसरा बदलाव बाला साहब देवरस के रहते साल 1973 में किया गया था. तब संघ के जूते सेना के समान भारी हुआ करते थे. उसकी जगह स्वंयसेवकों को साधारण काले जूते पहनने की अनुमति दी गई.

संघ के गणवेश में तीसरा बदलाव साल 2010 में किया गया. इस बार चमड़े की बेल्ट की जगह कपड़े की बेल्ट को गणवेश में शामिल किया गया था.

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